सुप्रीम कोर्ट के फैसले से केंद्र की ओर से रोकी गई बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं पर दुबारा काम शुरू कराने की प्रदेश सरकार की कोशिशों पर पानी फिर गया है। यही नहीं, उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने का सपना भी इसी के साथ चकनाचूर हो गया।
भौरोघाटी, पाला मनेरी जैसी बड़ी परियोजनाओं को पर्यावरण प्रेमियों के आंदोलन के चलते केंद्र ने काफी पहले रोक दिया था। इन परियोजनाओं को शुरू कराने की राज्य सरकार लगातार केंद्र में प्रयास कर रही है। साथ ही छोटी जल विद्युत परियोजनाओं के आवंटन की भी प्रक्रिया शुरू की है।
पढ़ेः सुप्रीम कोर्ट ने लगाई नए पॉवर प्रोजेक्ट पर रोक
बताया गया कि पांच से 25 मेगावाट क्षमता की 56 जल विद्युत परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभावों के अध्ययन का जिम्मा आईआईटी रुड़की को सौंप गया है। उसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से सरकार के प्रयासों को झटका लगा है। बड़ी परियोजनाओं के शुरू होने की उम्मीदें लगभग क्षीण हो गई हैं। छोटी परियोजनाओं के लिए भी अब सुप्रीमकोर्ट को संतुष्ट करना पड़ेगा।
लखवाड़-बयासी पर भी अड़ंगे की संभावना
इस साल के अंत तक लखवाड़-बयासी जैसी परियोजना पर भी काम शुरू होना प्रस्तावित है। अदालत के नए फैसले के बाद इस परियोजना पर भी अड़ंगे की संभावना बनती दिख रही है। हालांकि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से लखवाड़-बयासी समेत तीन नई जल विद्युत परियोजनाओं को हरी झंडी मिल चुकी है।
फेसबुक पर अपनी राय देने के लिए यहां क्लिक करें