उत्तराखंड के सरकारी सिस्टम का हाल बुरा है। कई काम तब ही आगे बढ़ते हैं, जब कोर्ट का डंडा चलता है। कई उदाहरण सामने है, जबकि कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया, तो सरकारी मशीनरी हरकत में आई।
राज्य में खाली पदों को न भरे जाने के कारण जो दिक्कतें पेश आ रही थीं, उस पर कोर्ट का ध्यान गया है। सख्त आदेश हुए, तो सारी प्रक्रिया शुरू हो गईं। फिर चाहे मामला बाल अधिकार संरक्षण आयोग के खाली पदों का हो या फिर नगर निकायों में एक्जीक्यूटिव ऑफिसर यानी ईओ की कमी का। अब सभी मामलों में झटपट कार्रवाई हो रही है।
बाल अधिकार संरक्षण आयोग में पांच सदस्यों के पद खाली रहना सरकार पर भारी पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को चार सप्ताह के भीतर इन पदों को भरने के आदेश दिए हैं। इस स्थिति से खफा सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोक दिया है। सकते में आई उत्तराखंड सरकार अब इन पदों को तेजी से भरने में जुट गई है। इसके लिए बनी हाई पावर कमेटी की मीटिंग एक मई को बुलाई गई है। कमेटी की अध्यक्ष बाल विकास मंत्री रेखा आर्य हैं। सरकार का कहना है कि पद भी भरे जाएंगे और जुर्माना भी।
उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग का जो ढांचा है, उसमें एक अध्यक्ष के अलावा छह सदस्य हैं। आयोग के अध्यक्ष पद पर कांग्रेस सरकार के जमाने में नियुक्त योगेंद्र खंडूड़ी काम कर रहे हैं। चुनाव आचार संहिता लागू रहने के दौरान पिछले दिनों आयोग के पांच पद खाली हो गए थे। इन्हें भरा नहीं गया। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में एक रिट दायर हुई, जिसमें पूरे देश में बाल संरक्षण आयोग के खाली पदों की स्थिति पर चिंता जताई गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस इस रिट पर सुनवाई के बाद उत्तराखंड के लिए आदेश जारी किए हैं। बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने इसकी पुष्टि की है। सरकार ने इन पदों को भरने के लिए हाई पावर कमेटी की मीटिंग एक मई को बुलाई है। बाल विकास मंत्री की अध्यक्षता वाली इस कमेटी में प्रमुख सचिव न्याय और प्रमुख सचिव श्रम भी शामिल हैं। विभागीय मंत्री रेखा आर्य के अनुसार सरकार का प्रयास है कि दो से तीन सप्ताह में ही इन पदों को भर लिया जाए।
ईओ के 60 खाली पदों पर अब दिखी तेजी
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प्रदेश के नगर निकायों में एक्जीक्यूटिव ऑफिसर यानी ईओ के 60 फीसदी से ज्यादा पद खाली हैं। हाल ये है कि कई ईओ के पास दो-दो नगर निकायों के चार्ज लंबे समय से है। इससे निकायों के कामकाज पर बुरा असर पड़ रहा है।
हाईकोर्ट के संज्ञान में एक रिट दायर करके जब ये मामला लाया गया, तो उसने सरकार को जल्द कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसके बाद, सरकारी मशीनरी ने झटपट भर्ती प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसमें से 50 फीसदी लोक सेवा आयोग से भरे जाने हैं, बाकि विभागीय प्रोन्नति से भरे जाने वाले पद हैं।
नगर विकास विभाग के ढांचे में ईओ के कुल 102 पद सृजित हैं। ईओ के ये पद वेतनमान के लिहाज से चार श्रेणियों में बंटे हैं। इस वक्त इनमें से 42 पर ईओ काम कर रहे हैं, जबकि 60 पद खाली चल रहे हैं। एक ईओ दो-दो नगर निकायों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान ये हो रहा है कि ऐसे निकाय, जहां पर दोहरी व्यवस्था में ईओ तैनात हैं, वहां पर विकास कार्यों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
खास तौर पर नगर पंचायतों में दोहरे चार्ज दिए गए हैं। इससे ईओ का समय और फोकस दोनों निकायों में आधा-आधा बंट रहा है। वैसे, ये स्थिति आज की नहीं है, बल्कि शुरू से ऐसा रहा है। कई बार पहले भी भर्ती प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन पद भरने की कार्रवाई नहीं हो पाई। हाईकोर्ट के आदेश पर एक बार फिर से नगर विकास विभाग ने इस मामले में तेजी दिखानी शुरू की है। शासन के एक अफसर के अनुसार, भर्ती प्रस्ताव लोक सेवा आयोग को भेजने के लिए तैयार कर लिया गया है। इसे अविलंब भेजा जा रहा है।