सुप्रीम कोर्ट ने लोकायुक्त की नियुक्ति की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में शीर्ष अदालत से मांग की गई है कि वह उत्तराखंड सरकार को लोकायुक्त को नियुक्त करने का निर्देश दे। राज्य में लोकायुक्त का पद वर्ष 2013 से खाली पड़ा है।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर, जस्टिस एएम खानविल्कर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।
भाजपा नेता और अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दाखिल की गई याचिका में कहा गया है कि उत्तराखंड लोकायुक्त एक्ट, 2011 में बेहतरीन प्रावधान किए गए हैं। इसे लागू किया जाना चाहिए। इसमें कहा गया है कि राज्य में वर्ष 2013 से कोई लोकायुक्त नहीं है, जबकि भ्रष्टाचार की 700 शिकायतें लंबित हैं।
उत्तराखंड के लोकायुक्त कानून के दायरे में मुख्यमंत्री, सभी मंत्री और विधायक भी आते हैं। इसमें भ्रष्टाचार के दोषी को उम्रकैद की कड़ी सजा तक का प्रावधान है, साथ ही उसकी संपत्ति भी जब्त की जा सकती है। पूर्व सीएम और पूर्व मंत्री-विधायक भी इसके दायरे में आते हैं।