जिला अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। सर्जरी वार्ड में भर्ती मरीज को स्टाफ ने एक्सपायरी डेट का इंजेक्शन दे दिया। इंजेक्शन लगता इससे पहले ही मरीज ने उसकी अंतिम तिथि देख ली। इंजेक्शन जुलाई में एक्सपायर होने की बात सामने आई है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो अधिकारियों में हड़कंप मच गया। अस्पताल प्रबंधन ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित से जवाब तलब किया है।
जानकारी के मुताबिक सहस्रधारा निवासी गौरव गुलाटी का छह दिन पहले कोरोनेशन अस्पताल में हर्निया का ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के बाद उनका उपचार सर्जरी वार्ड में चल रहा है। आरोप है कि उपचार के दौरान वार्ड स्टाफ की ओर से उन्हें एक इंजेक्शन दिया गया, जिसकी एक्सपायरी डेट निकल चुकी थी। इंजेक्शन लगाने से पहले मरीज ने दवा की शीशी पर अंकित एक्सपायरी डेट देखी तो मामला सामने आया। इसके बाद उन्होंने इंजेक्शन लगवाने से मना कर दिया। इस दौरान मौजूद लोगों ने घटना का वीडियो बना लिया। हालांकि अमर उजाला इस तरह के वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
घटना ने अस्पताल में दवाओं के भंडारण, वितरण और वार्ड तक पहुंचने से पहले उनकी जांच व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एक्सपायर दवा का उपयोग मरीज के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे में अस्पतालों में दवाओं की नियमित जांच और वार्ड स्तर पर दोबारा सत्यापन की व्यवस्था बेहद जरूरी है।अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. यतेंद्र सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर है और इसकी जांच कराई जाएगी। फार्मेसी और नर्सिंग कर्मचारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।