पुलिस ने दोनों के खिलाफ नेहरू कॉलोनी थाने में मुकदमे दर्ज किया। जांच में पता चला कि अभिनव पहले भी चरस तस्करी में पकड़ा गया था और तीन दिन पहले ही जेल से जमानत पर रिहा हुआ था। पूछताछ में यह भी पता चला कि वह 11 सितंबर 2012 को रुड़की जेल के डिप्टी जेलर की हत्या में भी शामिल था।
उसके बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ मुकदमों में निर्धारित समयावधि में चार्जशीट दाखिल की। अभिनव के खिलाफ मुकदमे में सोमवार को बहस पूरी हुई। उसके बाद न्यायालय ने अभिनव को मादक पदार्थों की तस्करी में 12 साल कठोर कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
जबकि, आयुध अधिनियम (तमंचा मिला था) के तहत तीन साल कैद की सजा सुनाई और 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने पर अभिनव को एक साल साधारण कारावास काटना होगा। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि अकलीम के खिलाफ मुकदमे में भी जल्द फैसला आने वाला है। फिलहाल सुनवाई जारी है।