पर्यावरण संरक्षण के लिए आंदोलन चलाने पर बहुगुणा को संयुक्त राष्ट्र संघ में बोलने का मौका मिला। जीवन भर समाज हित के लिए लड़ने वाले सुंदरलाल बहुगुणा को कई पुरस्कारों से नजावा गया। हालांकि 1981 में जंगलों के कटान पर रोक लगाने की मांग को लेकर उन्होंने पदमश्री पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया था।
उसके बाद केंद्र सरकार समुद्रतल से 1000 मीटर से ऊंचाई वाले इलाकों में वृक्ष कटान पर पूरी तरह से रोक लगा दी। जिससे उत्तराखंड के पर्यावरण को लाभ मिला। बहुगुगणा ने पर्यावरण संरक्षण के लिए जनमानस को जागरुक करने के लिए उत्तराखंड को पैदल नापकर कश्मीर से कोहिमा तक और गंगा संरक्षण के लिए गोमुख से गंगा सागर तक साइकिल यात्रा भी निकाली।
बहुगुणा के समाज हित और पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाए गए आंदोलन से प्रेरित होकर बीबीसी ने उन पर 'एक्सिंग द हिमालय' फिल्म भी बनाई। जीवन में समाज और पर्यावरण हित के लिए संघर्ष करने वाले बहुगुणा को कई पुरस्कार से नवाजा गया।
- वर्ष 1981 पद्मश्री ( इसे बहुगुणा ने नहीं लिया)
- वर्ष 1986 जमनालाल बजाज पुरस्कार
- वर्ष 1987 राइट लाइवलीहुड अवार्ड
- वर्ष 1989 आईआईटी रुड़की द्वारा डीएससी की मानद उपाधि
- वर्ष 2009 पद्मविभूषण, इसके अलावा राष्ट्रीय एकता पुरस्कार, शेरे कश्मीर अवार्ड समेत दर्जनों अन्य छोटे बड़े पुरस्कार भी इन्हें दिए गए। विश्वभारती विवि शांतिनिकेतन ने भी इन्हें डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि प्रदान की।