बुधवार को सायं 7:27 बजे जैसे ही सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश किया वैसे ही हेमंत ऋतु समाप्त हो गई। दो महीने चलने वाली शिशिर ऋतु शुरू हुई।
सूर्य की दक्षिण यात्रा को विराम मिला और अब छह महीनों तक सूर्य उत्तर की यात्रा करेंगे। इसी के साथ अग्नि उपासना के कईं के पर्वों का शुभारंभ हो गया।
अग्नि पर्वों का शुभारंभ
मान्यता है कि धनु राशि का त्याग कर जैसे ही सूर्य मकर में आते हैं, वैसे ही सर्दी तिल-तिल घटने लगती है। इसका नाता अग्नि पर्वों से है। मकर संक्रांति के दिन तथा पूर्व संध्या को साधक अग्नि उपासना करते हैं। लोहड़ी की आग में शीत को विदा देने का उपक्रम गुड़ और तिल चढ़ाकर किया जाता है।
मकर संक्रांति के दिन गंगा आदि पवित्र नदियों के तटों पर अग्नि प्रज्ज्वलित कर उत्तरायणी के संस्कार प्रारंभ होते हैं। यज्ञोपवीत संस्कार उत्तरायणी से शुरू होते हैं और उत्तरायणी के समापन तक चलते रहते हैं। ऐसे सभी संस्कारों में अग्नि तत्व प्रधान होता है।