उत्तराखंड में गन्ने का मूल्य घोषित न होने से सोमवार को राजधानी में किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। गुस्साए किसानों ने विधानसभा के सामने गन्ना जलाकर अपना विरोध जताया।
समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गन्ना मूल्य घोषित हो चुका है लेकिन उत्तराखंड सरकार गन्ना किसानों की समस्याओं के प्रति कतई गंभीर नहीं है।
हरिद्वार से दून पहुंचे किसानों ने विधानसभा के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि गन्ने की फसल तैयार है, लेकिन चीनी मिलें शुरू नहीं हो पाई है। इतना ही नहीं किसानों के गन्ने का बकाया भी भुगतान नहीं हुआ है।
औने पौने दामों पर बेचने को मजबूर
उन्होंने सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि गन्ने का मूल्य घोषित न होने से लोग अपनी फसल औने पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं। वहीं इससे गेहूं की बुआई में भी देरी हो रही है।
चेतावनी दी गई कि शीघ्र गन्ने का मूल्य घोषित कर मिलें शुरू न की गईं तो किसान ट्रॉलियों के साथ दून की सड़कों पर जाम लगाएंगे।
इसके बाद किसानों ने गन्ना मूल्य साढ़े तीन सौ रुपये घोषित करने की मांग को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन भेजा। प्रदर्शनकारियों में भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री संदीप खटाना, सिद्धार्थ बंसल, चौधरी जगपाल सिंह, महेंद्र सिंह, शक्ति सिंह सैनी, संजय सैनी, प्यारे लाल, सुरेंद्र सिंह, योगेश आदि शामिल थे।