यह उत्तराखंड के लिए सुखद पहलू है कि प्लास्टिक उद्योग से जुड़े लोगों में ईपीआर पंजीकरण को लेकर जागरूकता आई है। इसमें उत्तराखंड प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की ओर से भी कड़ी मेहनत की गई है। वर्तमान में ईपीआर रजिस्ट्रेशन के मामले में उत्तराखंड पहले नंबर पर है। यह हमारे लिए गर्व की बात है। - सुशांत पटनायक, सदस्य सचिव, पीसीबी
वित्तीय वर्ष के अंत में देना होता है पीडब्ल्यूपी का प्रमाण पत्र
पीसीबी में ईपीआर प्लान जमा करने के बाद प्लास्टिक उत्पादक कंपनियों को वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर रिसाइकिलिंग के लिए पंजीकृत प्लास्टिक वेस्ट प्रोसेसर्स (पीडब्ल्यूपी) कंपनियों से प्रमाण पत्र लेकर जमा करना होता है। ऐसा नहीं करने पर भी एनओसी को निरस्त किया जा सकता है। सीपीसीबी की साइट पर जारी आंकड़ों के अनुसार, देशभर में पंजीकृत पीडब्ल्यूपी कंपनियों की संख्या वर्तमान में 1768 है, जो कंपनियों से प्लास्टिक वेस्ट लेकर उसका रिसाइकिलिंग करती हैं। इसके बाद कंपनियों को इसका प्रमाण पत्र देती हैं।
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देशभर में मात्र 6921 कंपनियों ने जमा कराया है ईपीआर प्लान
केंद्रीय पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की साइट पर जारी आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2023 तक देशभर में 6921 कंपनियों ने ईपीआर प्लान जमा कराया है। इनमें से भी 278 कंपनियां उत्तराखंड की हैं।