देहरादून स्थित वेल्हम गर्ल्स स्कूल की 35 छात्राओं ने बांदल वैली के सीतापुर गांव में नहर के पानी को घराट तक पहुंचाने के लिए दीवार का निर्माण किया। अब नहर का पानी बर्बाद नहीं होगा और घराट तेजी से चलेगा।
छात्राओं ने गांव में तीन कंपोस्ट पेट बनाए, जिसमें डाले गए गोबर का इस्तेमाल खेती के लिए किया जाएगा। दीवार और कंपोस्ट बनाने के कार्य में मिस्त्री से लेकर मजदूरों तक का कार्य छात्राओं ने किया।
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हैस्को और अमर उजाला फाउंडेशन के सहयोग से शनिवार 22 सितंबर से वेल्हम गर्ल्स स्कूल का पांच दिवसीय शिविर सीतापुर गांव में लगा है। छात्राओं के साथ शिविर में आई अध्यापिका सीमा सागर और कृष्णा गुरु ने बताया कि शिविर में भाग लेने वाली छात्राएं बड़े घरों से हैं। इन्होंने कभी ऐसा जीवन नहीं जिया है।
प्रकृति और जीवन को करीब से देखा
कठिन शारीरिक श्रम से यह अभी तक अपरिचित थीं। लेकिन यहां आकर इन्हें अच्छा लग रहा है। हम प्रयास कर रहे हैं कि बच्चे वास्तविक प्रकृति और जीवन को करीब से देखें।
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हैस्को की डॉ. किरन नेगी ने बताया कि वेल्हम स्कूल लंबे समय से हमारी संस्था से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि इन छात्राओं की खास बात है कि यह टेकभनीकल माइंड की हैं लेकिन यहां आकर खुश हैं और मेहनत से काम कर रही हैं। इनको जमीनी हकीकत से अवगत कराना जरूरी है।
ऐसा कार्य नहीं किया
शिविर में भाग ले रही मौलिका खड़ेलवाल, अनुभूति मांगलिक, वानी प्रसाद और प्रिया चौधरी ने बताया कि हमने पहले ऐसा कार्य नहीं किया है। लेकिन यह हमारे लिए अच्छा अनुभव है। हमें नहीं पता था कि गांव की लोगों का जीवन इतना कठिन होता है। बच्चों ने बताया कि वे हैस्को के संस्थापक अनिल जोशी से बहुत प्रभावित हैं। कहा कि वह दोबारा ऐसे शिविर में भाग लेना चाहेंगे। शिविर का समापन बृहस्पतिवार को हो जाएगा।
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