पढ़ाई की चिंता ने बागेश्वर के बच्चों को हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत से गुहार करने को विवश किया है। बच्चों ने इन दोनों को पत्र लिखकर अतिथि शिक्षकों की जल्द तैनाती की मांग की है। इनका कहना है कि अतिथि शिक्षकों के अनुबंध समाप्त होने से स्कूलों में महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों के पद खाली हो गए हैं। इससे पहले अल्मोड़ा के बच्चों ने भी हाइकोर्ट को पत्र लिखकर बंदरों के आतंक से निजात दिलाने को कहा था। इसी तरह हल्द्वानी की नौ साल की ऋद्धिमा पांडे ने भी पिछले माह एनजीटी में याचिका दायर कर जलवायु परिवर्तन की प्रभाव से बच्चों को बचाने की गुहार की थी।
बागेश्वर जिले के हाइस्कूल और इंटर कालेजों में शिक्षकों के 478 पद रिक्त हैं। इन पदों पर पहले सत्र में जिले के विभिन्न विद्यालयों में लगभग 450 अतिथि शिक्षकों की तैनाती हुई थी। अभिभावकों का भी मानना है कि अतिथि शिक्षकों की तैनाती से दुर्गम स्कूलों का बोर्ड परीक्षा परिणाम पहली बार संतोषजनक रहा था। इसके बाद कुछ पदों में स्थायी तैनाती होने से 2016-17 सत्र में लगभग 260 अतिथि शिक्षक तैनात थे। 31 मार्च को अनुबंध समाप्त होते हुए शिक्षकों के पद फिर रिक्त हो गए हैं। अतिथि शिक्षकों के भविष्य का फैसला अब हाईकोर्ट में होना है।
ऐसे में ठीक शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले कई पद खाली होने से बच्चों को अब पढ़ाई की चिंता सताने लगी है। मलसूना, भटखोला सहित जिले के विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने हाइकोर्ट के न्यायाधीश और प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र भेजकर स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की तैनाती करने की मांग की है। यह पहला मामला नहीं है जब प्रदेश में बच्चे न्याय का दरवाजा खटखटाते दिख रहे हैं। इससे पहले अल्मोड़ा के बच्चों ने भी हाइकोर्ट को पत्र लिखकर बंदरों के आतंक से निजात दिलाने को कहा था। इनका कहना था कि बंदरों के डर से उनका स्कूल जाना बंद हो गया है। हाइकोर्ट की ओर से इस पर सरकार से जवाब भी मांगा गया था। इसी तरह हल्द्वानी की नौ साल की ऋद्धिमा ने भी एनजीटी में याचिका दायर की हुई है। याचिका में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन से बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं और बच्चों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए कोई काम नहीं किया जा रहा है।