प्रदेश के आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक कॉलेजों में इस साल यूएपीएमटी से ही दाखिले किए जाएंगे। आयुष मंत्रालय ने नीट की अनिवार्यता का नियम एक साल के लिए हटा दिया है। आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक कॉलेज संचालकों ने इस नियम पर सख्त आपत्ति जताई थी। आयुष मंत्रालय ने सभी राज्यों के लिए इसका आदेश जारी कर दिया है।
प्रदेश के आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक कॉलेजों में हर साल बीएएमएस, बीएचएमएस कोर्सेज में दाखिले उत्तराखंड आयुष प्री मेडिकल टेस्ट(यूएपीएमटी) से दाखिले होते हैं। प्रवेश परीक्षा का आयोजन उत्तराखंड आयुर्वेद विवि कराता है।
नीट की जगह कॉमन एंट्रेंस एग्जामिनेशन
demo pic
- फोटो : अमर उजाला
इस साल आयुष मंत्रालय ने देशभर में यह नियम लागू कर दिया था कि आयुष और होम्योपैथिक के कोर्सेज में भी मेडिकल की कॉमन प्रवेश परीक्षा नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट(नीट) से ही दाखिले होंगे। कॉलेजों ने इस पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि यह फैसला विलंब से लिया गया है।
यूएपीएमटी के इंतजार वाले तमाम छात्र नीट आवेदन में चूक गए हैं। मामले पर अब आयुष मंत्रालय ने अपने पैर पीछे खींच लिए हैं। मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक इस साल सभी सरकारी और प्राइवेट आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक कॉलेजों में दाखिले को नीट से एडमिशन की अनिवार्यता नहीं होगी।
इसके बजाए राज्य अपने स्तर पर कॉमन एंट्रेंस एग्जामिनेशन से सीटें भर सकते हैं। मंत्रालय के इस आदेश के साथ ही सूबे में एक बार फिर यूएपीएमटी की राह खुल गई है। हालांकि अगले सत्र से नीट का नियम लागू होगा।
इन कॉलेजों में होगा दाखिला
यूएपीएमटी से उत्तराखंड आयुर्वेद विवि हर्रावाला परिसर, ऋषिकुल आयुर्वेद परिसर, गुरुकुल परिसर, उत्तरांचल आयुर्वेद कॉलेज, हिमालयी आयुर्वेदिक, पतंजलि आयुर्विज्ञान संस्थान, क्वाड्रा इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, चंदोला होम्योपैथिक कॉलेज, परम हिमालय होम्योपैथिक कॉलेज, पतंजलि, हरिद्वार आयुर्वेद कॉलेज, मदरहुड आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज, ओम आयुर्वेदिक कॉलेज।
आयुर्वेद विवि के कुलसचिव डा.एके त्रिपाठी ने बताया कि आयुष मंत्रालय की रोक हटाने का पत्र प्राप्त हो चुका है। अब यूएपीएमटी आयोजन को लेकर शासन को पत्र भेजा जा रहा है। शासन के निर्देशों के तहत प्रवेश परीक्षा कराई जाएगी।