प्रथम अपर सिविल जज (अवर खंड) रिंकी साहनी की अदालत से कुमाऊं विश्वविद्यालय डीएसबी परिसर के प्रोफेसर पर आतंकवादी होने का आरोप लगाते हुए पर्चे बंटवाने के रुड़की निवासी दो आरोपियों को तीन-तीन माह के कारावास की सजा सुनाई गई।
डीएसबी के रसायन विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. शहराज अली पुत्र लियाकत अली की ओर से 19 अप्रैल, 2010 को न्यायालय को दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा कि मूल रूप से वह रुड़की के रहने वाले हैं। उनके परिवार की लगातार बढ़ रही प्रतिष्ठा से कुछ लोग जलन रखते हैं।
इसी क्रम में ग्राम अकबरपुर झबरेड़ा रुड़की निवासी खुर्शीद पुत्र अली हसन और वहीं के निवासी फुरकान पुत्र शरीफ ने पहले उनके क्षेत्र और बाद में डीएसबी परिसर में उन्हें आतंकवादी करार देते हुए फर्जी पर्चे बंटवाए।
सीजेएम की न्यायालय के बाद सिविल जज जज अवर खंड की न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई। इसके बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को आईपीसी की धारा 500 का दोषी पाते हुए तीन-तीन माह के कारावास की सजा सुनाई।