परमार्थ गुरुकुल में उत्पीड़न की शिकायत और आयोग के दौरे में आरोपों की पुष्टि के बाद भी यहां के शिक्षकों का रवैया पूर्व की तरह ही बना हुआ है। उत्पीड़न के आरोपी शिक्षक प्रभात का तर्क है कि छात्र ने भीड़ के दबाव में गलत बयान दे दिया है। संस्थान में किसी का उत्पीड़न नहीं हुआ है।
आरोपी शिक्षक की दलील है कि पढ़ाई के दौरान हल्का फुल्का बल प्रयोग करना पड़ता है, वह उत्पीड़न नहीं है। शिक्षक का बयान उस समय आया जब आयोग की अध्यक्ष भी उसके समीप ही बैठी हुई थीं। प्रभात का कहना है कि बच्चे को जितना अबोध समझा जा रहा है उतना नहीं है। आरोप तो मैं भी लगा सकता हूं, इसका अर्थ यह नहीं है कि शिकायत सही है।
सहमा छात्र गुरुकुल में रहने को तैयार नहीं
बाल संरक्षण आयोग की टीम के दौरे के बाद सवाल उठा कि उत्पीड़न का शिकार हुआ बच्चा कहां पढ़ेगा। इस पर आयोग अध्यक्ष ने प्रबंधन को हिदायत दी कि अब कोई दिक्कत नहीं होगी लिहाजा छात्र को गुरुकुल में ही रहने दिया जाए। वहीं छात्र ने गुरुकुल में रहने से इंकार कर दिया। हालांकि छात्र अभी अपनी मां सोनी के पास है। बच्चे के रिश्तेदार दीपेश उपाध्याय ने बताया कि सोनी की ओर से प्रबंधन को पत्र सौंपकर बच्चे को गुरुकुल से निकाल लिया गया है। सोनी मुरादाबाद में रहती हैं और वे वहां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं।
परमार्थ गुरुकुल में छात्र के उत्पीड़न का मामला सामने आने के बाद कुछ पुराने प्रकरण नए सिरे से खंगालने की नौबत आ गई है। वर्ष 2005 में गुरुकुल का ही एक छात्र अचानक गायब हो गया था। इस संदर्भ में बुधवार को आयोग अध्यक्ष के दौरे पर भी गुरुकुल प्रबंधन से सवाल जवाब हुआ। इस दौरान गुरुकुल इंचार्ज नंदू बाला व्यास ने बताया कि कुमाऊं के रहने वाले 13 वर्षीय शरद नामक बच्चे से जुड़ा मामला है।
करीब 14 बच्चे गंगा स्नान को गए थे। सभी ने रजिस्टर में एंट्री भी की थी। गंगा स्नान के दौरान एक छात्र डूब गया था। इस संदर्भ में आईडीपीएल चौकी भी सूचना भी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद की जानकारी मुझे नहीं है। आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि बच्चे के गायब होने की सूचना मुझे नहीं है। मामला संज्ञान में आया है। आयोग इस प्रकरण का संज्ञान लेगा और पूरे मामले की जांच फिर से कराई जाएगी।