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डिस्चार्ज होते ही फिर बिगड़ी पायलट बाबा की तबियत, जिला अस्पताल में कराया भर्ती

Wed, 10 Apr 2019 06:25 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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पायलट बाबा - फोटो : अमर उजाला
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धोखाधड़ी के आरोप में जेल गए पायलट बाबा की तबियत अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही फिर बिगड़ गई। जेल प्रशासन ने उन्हें नैनीताल के बीडी पांडेय जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें सांस लेने में काफी परेशानी हो रही है। इसके साथ ही उनका शुगर भी काफी बढ़ गया है। वहीं उन्हें यूरिन इंफेक्शन भी बताया जा रहा है। 

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बता दें कि, जेल जाने के बाद गुरुवार देर रात सीने में भारीपन, ब्लड प्रेशर और सांस की दिक्कत के कारण पायलट बाबा को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दौरान डॉक्टरों ने उनकी दोनों किडनी फेल बताई थी। इसके बाद उन्हें आज दोपहर डॉक्टरों ने अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया था। 

लेकिन आज ही दोपहर बार जेल पहुंचते ही उनकी हालत फिर बिगड़ गई। इसके बाद जेल प्रशासन ने उन्हें बीडी पांडेय अस्पताल में भर्ती कराया। सूत्रों का कहना है कि उनकी हालत ज्यादा खराब है इसलिए उन्हें हायर सेंटर रेफर करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि अभी इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। वहीं पायलट बाबा के स्वास्थ्य के संबंध में अदालत से मांगी गई रिपोर्ट भी  सीएमओ ने सील बंद लिफाफे में भेज दी है। 

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हाईकोर्ट में पायलट बाबा के मामले की सुनवाई 12 अप्रैल को 

हाईकोर्ट ने पायलट बाबा की जमानत याचिका पर 12 अप्रैल को सुनवाई करना तय किया है। कोर्ट ने पायलट बाबा की ओर से 2010 में दर्ज प्राथमिकी की विवेचना कर रहे पुलिस अधिकारी को कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट पेश करने का आदेश भी दिया। 

हल्द्वानी में गौजाजाली के रहने वाले हरीश पाल ने ज्योलिकोट थाने में 25 नवंबर 2008 को एक प्राथमिकी दर्ज कर कहा था कि आइकवा इंटरनेशनल एजुकेशन ने तल्ला गेठिया में कंप्यूटर सेंटर संचालन के लिए उनको करीब 50 हजार रुपये देने का आश्वासन हिमांशु राय, पायलट बाबा, इशरत खान व अन्य ने दिया था। यह मामला जिला एवं सत्र न्यायाधीश नैनीताल की कोर्ट ने पहुंचा था और कोर्ट ने पायलट बाबा को जेल भेज दिया था। 

पायलट बाबा ने हाईकोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दायर किया था। जमानत याचिका में कहा था कि वह 6 दिसंबर 2006 से 4 जनवरी 2007 तक टोकियो में थे। हिमांशु राय ने उनकी सोसायटी के पंजीकरण करने के लिए 19 दिसंबर 2006 को फार्म खरीदा था और 20 दिसंबर को उनके फर्जी हस्ताक्षर करके 22 दिसंबर 2006 को सोसायटी का पंजीकरण करा दिया गया ।

2010 में रजिस्ट्रार चिट फंड सोसायटी में इसकी शिकायत की गई। रजिस्ट्रार ने 24 सितंबर 2010 हिमांशु राय के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश थानाध्यक्ष मुखानी को दिया। थानाध्यक्ष ने आगे कोई कार्यवाही नहीं की।
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