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उत्तराखंड: स्कूल की किताबों के लिए नहीं थे पैसे छात्र ने दे दी जान, मजदूरी करके परिवार पालता है पिता

Fri, 06 Jul 2018 10:28 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटद्वार
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किताबें नहीं मिली तो किया सुसाइड
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भविष्य के सपने संजोए गरीब परिवार के दसवीं के छात्र सौरभ को जब स्कूल जाने के लिए किताबें नहीं मिलीं तो उसने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। यह घटना कोटद्वार भाबर के ग्राम पंचायत दुर्गापुर के खूनीबड़ गांव की है।  

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दुर्गापुर के पूर्व प्रधान वीरेंद्र सिंह ने बताया कि खूनीबड़ निवासी रविंद्र सिंह यहां मजदूरी कर अपने परिवार की आजीविका चलाता है। उसके दो बेटे और दो बेटियों में सौरभ (16) सबसे बड़ा था। वह राजकीय हाईस्कूल जीवानंदपुर में दसवीं में पढ़ रहा था। उसके पास पढ़ाई के लिए किताबें नहीं थीं।

ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद स्कूल खुलने पर भी वह बिना किताबों के ही स्कूल जा रहा था। सहपाठियों के पास किताबें देख वह लगातार अपने पिता से किताबें दिलाने की मांग कर रहा था, लेकिन मजदूर पिता माली हालत होने से उसे किताबें नहीं दिला पा रहा था।

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पिता के जाने के बाद सौरभ स्कूल नहीं गया

बृहस्पतिवार सुबह एक बार फिर सौरभ ने अपने पिता से किताबों की मांग की। पिता ने पैसे न होने की बात कहते हुए किसी तरह उसे मनाया और मजदूरी ढूंढने के लिए निकल पड़ा। पिता के जाने के बाद सौरभ स्कूल नहीं गया।

पूर्वाह्न करीब 11 बजे श्रमिक पिता काम नहीं मिलने के कारण घर लौटा तो बेटे का कमरा अंदर से बंद था। उसने बेटे को आवाज दी, लेकिन दरवाजा नहीं खुला। उसने अनहोनी की आशंका से पास में पड़े सब्बल से दरवाजा तोड़ डाला। दरवाजा टूटते ही देखा तो कमरे के अंदर बेटे का शव गले पर साड़ी के फंदे के सहारे पंखे से लटका हुआ था।

उसने बच्चे के जिंदा होने की उम्मीद पर उसे पंखे से उतारा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। ग्रामीणों ने पुलिस को घटना की सूचना दी। इस घटना से पूरा गांव सकते में है। एसएसआई राकेंद्र कठैत ने बताया कि पूछताछ में मृतक के परिजनों ने उसके पास किताबें नहीं होने की बात कही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया गया है।  
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दसवीं के छात्र के खुदकुशी मामले में अधिकारियों का वर्जन

दो जुलाई को स्कूल खुली है। दसवीं के छात्र सौरभ सिंह की खुदकुशी की खबर से हमें बहुत दुख हुआ है। वह पढ़ाई में सामान्य था। उसने कभी भी किताबें न खरीद पाने की मजबूरी शिक्षकों को नहीं बताई। जब कभी कोई भी छात्र या छात्रा के परिवार की माली हालत कमजोर होने की बात शिक्षकों को बताते हैं तो वह अपने स्तर पर बच्चों को किताबें, पाठ्य सामग्री और ड्रेस के लिए मदद करते हैं।  
- बीना मित्तल, प्रधानाचार्य, राजकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जीवानंदपुर (शिवराजपुर)

सरकार की ओर से केवल आठवीं कक्षा तक के लिए ही निशुल्क पाठ्य पुस्तकें प्रदान की जाती है। हाईस्कूल से ऊपर के छात्रों को खुद ही पाठ्य-पुस्तकों और ड्रेस का प्रबंध करना पड़ता है। राजकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जीवानंदपुर (शिवराजपुर) के दसवीं कक्षा के छात्र सौरभ सिंह की खुदकुशी की घटना दुखद है।  
- सुषमा दास, खंड शिक्षा अधिकारी दुगड्डा ब्लॉक
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