समन्वयक उप्पल के अनुसार छात्र मनीष ने हेल्प लाइन में शिकायत की थी कि होमवर्क नहीं करने पर स्कूल में शिक्षक ने उसकी पिटाई की और जब उसने विद्यालय से नाम कटवाने की इच्छा जताई तो शिक्षक ने उसे टीसी के बजाय चरित्रहीन प्रमाण-पत्र जारी करने की बात कही थी।
इससे मनीष काफी परेशान था। इस संबंध में उसने पिता को भी बताया था। उप्पल के अनुसार चाइल्ड हेल्प लाइन टीम ने छात्र से बुधवार सुबह स्कूल में ही मिलकर समस्या का समाधान कराने की बात कही थी, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही छात्र ने आत्महत्या कर ली। मनीष हाईस्कूल भराणगांव में नौवीं कक्षा का छात्र था।
थानाध्यक्ष महादेव उनियाल ने बताया कि पुलिस को बुधवार को पूर्वाह्न 11 बजे परिजनों ने आत्महत्या की सूचना दी है। हालांकि अभी तक इस मामले में किसी के खिलाफ तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
कोटद्वार भाबर क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत दुर्गापुर के खूनीबड़ गांव में विगत पांच जुलाई को किताबें नहीं मिलने पर छात्र सौरभ ने फांसी का फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी।
सौरभ राजकीय हाईस्कूल जीवानंदपुर में दसवीं कक्षा में पढ़ता था। माली हालत कमजोर होने से सौरभ के पिता उसके लिए किताबें नहीं खरीद पा रहे थे।
इस घटना का अहम पहलू यह है कि राज्य सरकार की ओर से हाईस्कूल में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्र-छात्राओं को भी निशुल्क पाठ्य-पुस्तकें दिलाने की व्यवस्था है। सौरभ इसके लिए पात्र था। इसके बावजूद किताबों के लिए मिलने वाली छह सौ रुपये की धनराशि सरकार से नहीं मिल पाई थी।