आपदा से प्रभावित उत्तराखंड के जर्जरहाल स्कूलों में नौनिहाल खतरे में पढ़ रहे हैं। सरकारी बेसिक और जूनियर हाईस्कूलों में 986 स्कूलों को बृहद मरम्मत की जरूरत है।
वहीं 468 स्कूल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हैं। जर्जर स्कूलों में पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जनपदों के स्कूलों का सबसे बुरा हाल है। शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि स्कूलों के लिए पर्याप्त बजट न होने से स्कूलों की मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम नहीं हो पा रहा है।
दून में सचिवालय से लगे जीजीआईसी राजपुर की स्थिति से प्रदेश के अन्य स्कूलों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। राजधानी में बालिकाओं का यह विद्यालय जर्जरहाल है, बारिश होते ही क्लासरूम में पानी टपकने लगता है और स्कूल भवन गिरने को है।
यही हाल देहरादून जिले के 269 स्कूलों का और है। इसमें 175 स्कूलों को बृहद मरम्मत की जरूरत है। इसमें 94 स्कूल भवन अत्यधिक क्षतिग्रस्त होने से उनका पुनर्निर्माण होना है। पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी, चंपावत और चमोली जिले में भी कई स्कूल भवन जर्जर बने हैं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए पर्याप्त बजट न होने से प्रदेश के स्कूलों की यह स्थिति बनी है। बेसिक और जूनियर के अलावा माध्यमिक के भी छह सौ से अधिक स्कूल जर्जरहाल हैं।
जनपद-बृहद मरम्मत-पुनर्निर्माण की जरूरत
अल्मोड़ा-32-46
बागेश्वर-23-15
चमोली-39-21
चंपावत-57-19
देहरादून-175-94
हरिद्वार-03-02
नैनीताल-23-67
पौड़ी-107-33
पिथौरागढ़-177-59
रुद्रप्रयाग-16-16
टिहरी-90-39
ऊधमसिंह नगर-45-22
उत्तरकाशी-199-36
स्कूल भवनों की वाकई बुरी स्थिति है, दो बार दैवीय आपदाएं आ चुकी हैं। रमसा और एसएसए के माध्यम से केंद्र की ओर से दिए जाने वाले बजट में भी कटौती की गई है। स्कूल मरम्मत के लिए एनजीओ और कंपनियों से सहयोग के लिए कहा जा रहा है। प्रयास किया जा रहा है कि समस्त स्कूलों की स्थिति को सुधारा जा सके।
- मंत्री प्रसाद नैथानी, शिक्षा मंत्री