नमामि गंगे परियोजना के तहत नदी के बहाव को अविरल करने के लिए अंदर से गाद निकालने का ठेका निजी खनन एजेंसियों को देने की तैयारी है।
ऐसे में गाद के साथ रेत-बजरी के अवैध खनन का अंदेशा केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को सताने लगा है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने अभी से पेशबंदी शुरू कर दी है। अवैध खनन की स्थिति में बचाव के लिए ढाल के रूप में कमेटियां गठित की जा रही हैं।
उत्तराखंड के भीमगौड़ और पश्चिम बंगाल के फरक्का तक गंगा से गाद निकाली जाएगी। इसमें डेढ़ सौ से अधिक कंपनियों को ठेका मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है। इनमें कई कंपनियां ऊंची राजनीतिक पहुंच वाले खनन माफिया की हैं।
गंगा की धारा को दुरुस्त करने के लिए आवंटित चुगान के अधिकतर ठेकों में अब तक अवैध खनन की शिकायतें मिली हैं और विभिन्न स्थानों पर वाद दाखिल हुए हैं। इन अनुभवों के आधार पर केंद्र सरकार ने अवैध खनन की शिकायतों के जवाब देने के लिए कमेटी गठित कर दी है।
राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी प्राधिकरण (एनजीआरबीए) के विशेष सदस्य माधव चिताले की अध्यक्षता में केंद्र के गाद कमेटी गठित करने के बाद अब राज्य सरकार भी रिवर टेमिंग के नाम पर योजना बना रही है। दोनों सरकारों ने अपनी योजना का मकसद खनन कारोबारियों को खनन करने के तरीके सिखाना बताया है, जिससे इको सिस्टम दुरुस्त रहे और धारा अविरल रहे।
वैसे पर्यावरण स्वीकृति में ये बातें पहले से ही बताई जा रही हैं। खनन मंत्री नव प्रभात का कहना है कि पर्यावरण को दुरुस्त रखने के लिए रिवर टेमिंग प्रोग्राम शुरू किया जा रहा है। नदी में गाद और उपखनिजों का ऐसा चुगान किया जाए कि जलधारा का रूट प्रभावित न हो।