सचिवालय की हड़ताल यदि लंबी चली तो इसका असर विधानसभा के सत्र पर भी पड़ेगा। प्रश्नकाल में विपक्ष की ओर से पूछे जाने वाले करीब 300 प्रश्न जवाब के लिए अनुभागों में पड़े हैं।
प्रश्नकाल पर ही प्रश्न खड़े हो जाएंगे
यदि मामला शांत नहीं हुआ सत्र के प्रश्नकाल पर ही प्रश्न खड़े हो जाएंगे। उधर, सचिवालय में बैठकर काम करने वाले अफसरों को भी अब दिक्कत आ रही है। अभी तक तो निजी स्टाफ को किसी तरह संभालकर काम हो रहा था लेकिन अब मामला बिगड़ता जा रहा है।
आगामी 24 नव्रंबर से विधानसभा का शीतकालीन सत्र प्रस्तावित है। यदि हड़ताल जारी रही तो प्रश्नकाल से संबंधित किसी भी सवाल का जवाब नहीं भेजा जा सकेगा। ऐसी स्थिति पैदा होने पर विपक्ष इसे मुद्दा भी बना सकता है। विभिन्न अनुभागों में लगभग तीन सौ प्रश्न लंबित हैं जिनका जवाब विधानसभा सचिवालय को भेजा जाना है।
और, पिछले तीन दिनों से सचिवालय में किसी भी फाइल का ना तो मूवमेंट है और ना ही पत्रावलियों का आवागमन हो रहा है। अभी तक प्रमुख सचिव व सचिवों और अपर सचिवों का निजी स्टाफ निजी तौर पर अपने अपने अफसरों के लिए काम कर रहा था लेकिन अब वह भी मुश्किल हो गया है। इसलिए जो थोड़ा बहुत काम चल रहा था वो भी ठप हो गया।
आज की स्थिति में प्रमुख सचिव से लेकर संयुक्त सचिव तक सभी अफसर पूरी तरह से खाली बैठे हुए है। इससे हर रोज कामकाज का बड़ा नुकसान हो रहा है।
हालांकि कुछ वरिष्ठ अफसर सचिवालय की फाइलों को बाहर ही बैठकर निस्तारित कर रहे है। अनुभाग पूरी तरह से बंद होने के कारण कोई नई फाइल भी तैयार नहीं हो रही है। जो अफसर सचिवालय में आ भी रहे हैं वो पूरी तरह से खाली बैठे हुए है।