शहर में सफाई व्यवस्था संभाल रही ईकोन-वाटरग्रेस कंपनी के कर्मचारियों की हड़ताल 48 घंटे बाद खत्म हो गई, लेकिन बृहस्पतिवार की शाम तक भी कई इलाकों से कूड़ा नहीं उठा। लोगों ने सड़क किनारे कूड़ा फेंक दिया इससे जगह-जगह गंदगी के ढेर लग गए।
दरअसल, कर्मचारी समय से वेतन जारी करने और कूड़ा बीनने से न रोकने की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए थे। कंपनी और कर्मचारियों के बीच कई दौर की वार्ता के बाद बृहस्पतिवार को हड़ताल खत्म हो गई। 48 घंटे चली हड़ताल के कारण 47 वार्डों के करीब 60 हजार घरों से कूड़ा उठान प्रभावित रहा। इस कारण कारगी-मोथरोवाला रोड, लक्खीबाग, कारगी के पास नाला, धोरण, सहस्त्रधारा रोड, बल्लुपुर, करनपुर सहित कई इलाकों में लोगों ने सड़क किनारे कूड़ा फेंक दिया। मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खन्ना ने कहा कि कंपनी की वजह से शहर की में कूड़ा एकत्र करने की व्यवस्था बिगड़ी है। कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी। ईकोन-वाटरग्रेस के मैनेजर विशांत चौधरी ने बताया कि कंपनी और कर्मचारियों बीच बातचीत सफल रही। बृहस्पतिवार सुबह से कूड़ा उठान शुरू कर दिया गया है।
धोरण से कूड़ा नहीं उठने पर निगम ने काटा 50 हजार का चालान
हड़ताल के कारण नगर के कूड़ा ट्रांसफर सेंटर धोरण से भी कूड़ा नहीं उठा। इससे वहां ढेर लग गया। इस पर नगर निगम ने ईकोन-वाटरग्रेस कंपनी का 50 हजार रुपये का चालान किया। इसके अलावा पलटन बाजार में भी सार्वजनिक स्थान पर कूड़ा फैलाने पर निगम की टीम ने एक व्यक्ति का पांच हजार रुपये का चालान किया।
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वैकल्पिक व्यवस्था कर निगम ने तीसरी कंपनी से मांगा सहयोग
हड़ताल से कूड़ा उठान की व्यवस्था प्रभावित होने पर नगर निगम ने तीसरी कंपनी से सहयोग मांगा। इसके बाद पॉश इलाकों का कूड़ा तो उठा, लेकिन अन्य जगहों की स्थिति जस की तस बनी रही।