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धर्मनगरी में अभी और छाएगा अंधेरा

Fri, 14 Feb 2014 11:37 PM IST
अमर उजाला, हरिद्वार
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नगर निगम का स्ट्रीट लाइट का ठेका प्रकरण नैनीताल हाईकोर्ट पहुंच गया है। इससे धर्मनगरी में हाल-फिलहाल अंधेरा छटने की उम्मीद कम हो गई है।
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सोमवार को होगी सुनवाई
नगर निगम बोर्ड के फैसले के खिलाफ एलईडी लाइट का ठेका लेने वाली दिल्ली की फर्म ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया हैं। बृहस्पतिवार को उनकी रिट मंजूर कर ली हैं और 17 फरवरी को सुनवाई होनी है।

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नगर निगम के पास स्ट्रीट लाइट के लिए 13वें वित्त आयोग से प्राप्त 40 लाख रुपये का स्ट्रीट लाइट का सामान मंगाने के लिए 18 दिसंबर को टेंडर करा दिए थे।

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एमएनए ने एलईडी लाइट के लिए दिल्ली की फर्म को सामान की आपूर्ति के लिए पीओ (पर्चेज आर्डर) भी दे दिया था। लेकिन, 28 दिसंबर को बोर्ड ने एलईडी की लाइट का विरोध करते हुए ठेका निरस्त कर दिया और सीएफएल मंगाने का प्रस्ताव पारित किया।
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पार्षद मांग रहे थे कमीशन

ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि कुछ पार्षदों ने कमीशन नहीं मिलने पर टेंडर निरस्त कराया है। आरोप पर कई पार्षदों ने सदन में ठेकेदारों से कमीशन मांगने वाले पार्षदों का नाम बताने की मांग भी की थी।

फर्म का दावा
एलईडी लाइट देने का ठेका लेने वाली फर्म मित्तल एंड ब्रदर्श दिल्ली का दावा है कि 18 दिसंबर को स्ट्रीट लाइट के टेंडर हुए थे। उसने एलईडी लाइट का ठेका लिया था।

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नगर निगम ने 28 दिसंबर को पीओ जारी कर 31 दिसंबर तक माल देने का आर्डर किया था। फर्म नियत समय में माल ले आई थी और निगम अधिकारियों को अवगत करा दिया था।

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21 जनवरी को फर्म को सूचित किया कि हमारे रेट अधिक हैं और समय पर उसने माल की आपूर्ति भी नहीं की है। इसी के आधार पर वह हाईकोर्ट गए हैं।
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नहीं हो पाया था टेंडर

बोर्ड निर्णय के बाद दोबारा स्ट्रीट लाइट के सामान के लिए शुक्रवार को 40 लाख रुपये का टेंडर होना था, लेकिन सार्वजनिक अवकाश के कारण टेंडर नहीं हो पाए हैं।

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अब टेंडर कब लिए जाएंगे इसकी नई तिथि तय की जाएगी। 17 फरवरी को हाईकोर्ट में नगर निगम मजबूती के साथ अपना पक्ष रखेगा।

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निगम ने ठेका लेने वाली फर्म की पात्रता पर ही सवाल उठाए हैं। हाईकोर्ट का फैसला आने तक निगम सभी आवश्यक सार्वजनिक स्थानों पर स्ट्रीट लाइट की जरूरी व्यवस्था करेगा।
-विप्रा त्रिवेदी, एमएनए।
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