कार्बेट टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा का जिम्मा जल्द ही स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (एसटीपीएफ) पर आ जाएगा।
फोर्स के गठन पर वन और गृह विभाग में सहमति बन गई है। इसी माह अंत तक शासनादेश आने की उम्मीद है। खास बात यह है कि जरूरत पड़ने पर फोर्स के जवानों को गोली चलाने की भी अनुमति होगी।
पांच साल से लटका है मामला
पांच साल से एसटीपीएफ का गठन का मामला लटका हुआ था। आपत्ति लगाई गई थी कि एसटीपीएफ कर्मी कार्बेट के भीतर गोली नहीं चला सकते। गोली लगने से कोई व्यक्ति घायल हो जाए या उसकी मौत हो जाए तो वन कर्मी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है।
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फोर्स के पक्षकारों का कहना था कि कार्बेट में शिकारियों के अलावा कोई दूसरा व्यक्ति अनधिकृत तौर पर कैसे और क्यों घुसेगा। इसके अलावा फोर्स को गोली चलाने का अधिकार ही नहीं होगा तो इसके गठन से क्या लाभ होगा।
गोली चलाने की अनुमति
लंबी माथापच्ची के बाद शासन स्तर पर गृह और वन विभाग में फोर्स को कार्बेट के भीतर गोली चलाने की अनुमति पर सहमति दे दी गई।
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यह भी तय हुआ कि जवानों पर तब तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं कराया जाएगा, जब तक मजिस्ट्रेटी जांच की रिपोर्ट न आए। ड्यूटी के अलावा गोली चलाने की अनुमति नहीं होगी।
110 जवान होंगे तैनात
एसटीपीएफ में 110 जवानों की तैनाती की जानी है। इसमें लगभग 20 फीसदी जवान कार्बेट रिजर्व के आसपास के गांवों से लिए जाएंगे। शेष पदों पर प्रदेश के दूसरे जिलों के युवक भी आवेदन कर सकते हैं।