देवभूमि में पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। नीति निर्धारक पर्यटन को उत्तराखंड की रीढ़ तो कहते हैं, लेकिन जिनके जिम्मे पर्यटकों की मेजबानी है, वह उससे मुंह मोड़े बैठे हैं।
देहरादून आने वाले पर्यटकों के लिए विभागीय व्यवस्था खुद में एक सवाल खड़ी करती है कि आखिर कोई दून घूमने आए तो क्यों? न तो विभाग पर्यटकों के लिए पर्यटक सुविधा केंद्र संचालित कर पा रहा है, न ही आकर्षक योजनाओं को धरातल पर उतारा गया।
बस या रेलगाड़ी से दून पहुंचने वाले पर्यटक को अगर दून के मुख्य पर्यटक स्थलों के बारे में जानकारी लेनी हो तो उसे पहले पर्यटक विभाग के सुविधा केंद्र तलाशने पड़ते हैं। तमाम पर्यटक सूचना केंद्रों की स्थिति बदहाल है। प्रमुख पर्यटक स्थलों के आसपास पर्यटक सुविधा केंद्र खोले गए थे।
इनका संचालन गढ़वाल मंडल विकास निगम कर रहा था, लेकिन अब सभी बदहाल हैं। टपकेश्वर मंदिर, सहस्त्रधारा में खोले गए पर्यटक सुविधा केंद्र बंद कर दिए गए हैं। त्यूणी के पास अटाल में भी गढ़वाल मंडल विकास निगम पर्यटक आवास केंद्र नहीं चला पाया।
विभाग से इनकी बदहाली के बाबत पूछा गया तो अधिकारियों का कहना था कि अब इन्हें पब्लिक प्राइवेट मोड में चलाने की तैयारी है। पर्यटकों के लिए पर्यटन विभाग अथवा जीएमवीएन की तरफ से कोई हेल्पलाइन की सुविधा नहीं है। पर्यटकों को बुनियादी जानकारी कहां से मिले, दिक्कत होने पर वह कहां संपर्क करें इसका कोई इंतजाम नहीं है।
पर्यटक सुविधा केंद्रों का हाल
कोल्हूखेत में पर्यटक सुविधा केंद्र गढ़वाल मंडल विकास निगम नहीं चला पाया। अब उसे मसूरी नगर पालिका संचालित कर रही है। हालांकि पर्यटक सुविधा केंद्र बंद कर दिया गया है। इसी तरह टपकेश्वर मंदिर में पर्यटक सुविधा केंद्र अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
बंद हुई दून दर्शन सेवा
प्रिंस चौक के पास स्थित होटल द्रोण में जिला पर्यटन अधिकारी का कार्यालय है। यहीं पर एक दफ्तर बनाया गया था, जहां देहरादून के प्रमुख दर्शनीय स्थलों के लिए वाहन सेवा की सुविधा मिलती थी। इस सेवा को दूनदर्शन नाम दिया गया था।
चंद घंटों में नगर के मुख्य स्थानों की सैर कराई जाती थी। गढ़वाल मंडल विकास निगम की निष्क्रियता की वजह से इसे भी बंद कर दिया गया है।
पांच माह से नहीं मिला वेतन
गढ़वाल मंडल विकास निगम खुद ही बदहाल है। निगम के कर्मचारियों को पिछले पांच महीने से वेतन नहीं मिल रहा है। इस वजह से वहां पर सब कुछ हो रहा है सिवाय काम के। निगम के लगभग सारे वेंचर फेल हो गए हैं।
निगम से वापस ले रहे काम : गंगवार
जिला पर्यटन अधिकारी वाईएस गंगवार का कहना है कि गढ़वाल मंडल विकास निगम के कई वेंचर विफल हो गए हैं। सहसत्रधारा, टपकेश्वर, कोल्हूखेत, अटाल (त्यूणी केनिकट) में पर्यटक सेवा केंद्र निगम से वापस लिए गए हैं। ऐसा इसलिए किया गया चूंकि वहां इनका संचालन नहीं हो पा रहा था।
अब इन्हें पीपीपी मोड में चलाया जाएगा। स्थानीय लोगों को इनका संचालन करने का मौका दिया जाएगा। इससे रोजगार भी सृजित होंगे। सहसत्रधारा में तो निगम से पर्यटक सुविधा केंद्र वापस ले लिया गया है। एक स्थानीय व्यक्ति को उसके संचालन का जिम्मा दिया गया है। फिलहाल वहां रंगाई पुताई का काम चल रहा है।
सफल रहा है डीएमसी मॉडल
राजधानी के पर्यटक स्थल सहसत्रधारा व गुच्चू पानी में पर्यटकों को सुविधा देने का नया मॉडल तैयार किया गया। इस व्यवस्था में पर्यटक स्थल का प्रबंधन गंतव्य प्रबंधन समिति (डेस्टिनेशन मैनेजमेंट कमेटी) करती है।
इसमें स्थानीय निवासी ही मुख्य रूप से होते हैं। वही इसका संचालन एवं प्रबंधन करते हैं। जिला पर्यटन अधिकारी वाईएस गंगवार ने बताया कि दोनों पर्यटक स्थल इस मॉडल के बाद शानदार तरीके से काम कर रहे हैं।
लांच होगा ई-न्यूज लेटर व ट्वीटर हैंडल
27 सितंबर रविवार को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर गढ़वाल मंडल विकास निगम मुख्यालय में ई-न्यूज लेटर लांच किया जाएगा। साथ ही ट्वीटर भी लांच किया जा रहा है। इसमें पर्यटकों को विभिन्न सूचनाएं देने की व्यवस्था होगी। पर्यटकों को रविवार को होटलों, आवास गृहों में आवासीय मद तथा भोजन मद में तीस व पच्चीस प्रतिशत छूट मिलेगी।
साफ-सफाई, पौधरोपण, गोष्ठी समेत कई कार्यक्रम आज
डीटीओ वाईएस गंगवार ने बताया कि रविवार को गुच्चु पानी में दस बजे पौधरोपण होगा। पूर्वाहन 11 बजे होटल द्रोण में पर्यटन पर गोष्ठी का आयोजन होगा। गढ़ी कैंट स्थित टपकेश्वर महादेव मंदिर में साफ-सफाई अभियान इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट के छात्र चलाएंगे। आईएचएम में पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन होगा।