लोग कुछ भी कहें राजधानी देहरादून निवासी अज्जो देवी का सहारा तो साईं ही हैं।
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कंडोली निवासी 70 वर्षीय अज्जो की साईं बाबा पर पूर्ण श्रद्धा है। अज्जो के पति और बेटों ने उनका साथ छोड़ दिया है। बाबा की दर से ही अज्जो का गुजारा चल रहा है।
अज्जो कहती हैं कि लोग साईं बाबा के बारे में कुछ भी कहें लेकिन मेरा घर तो बाबा के ही सहारे चल रहा है। मेरा बाबा पर पूरा विश्वास है।
अज्जो ने बताया कि जब बच्चे छोटे थे तो पति ने साथ छोड़ दिया। दो बेटे और तीन बेटियों को लोगों के घरों में खाना बनाकर पाला। दो बेटियों की शादी हो गई है।
जब तक बाबा हैं, हमारा घर चलता रहेगा
विवाह होते ही दोनों बेटे अलग हो गए। बताया कि दो साल पहले मेरा एक्सीडेंट हुआ और काम करने की स्थिति में नहीं रही।
तब से हर रोज दिन का खाना साईं मंदिर में खाने आती हूं। सुबह से शाम तक यहीं बैठी रहती हूं, जो मिलता है उसी से घर चलता है।
सबसे छोटी बेटी है, जो कंप्यूटर का कोर्स कर रही है। अज्जो कहती हैं कि मैंने बेटी से कहा कि तुझे काम करने की जरूरत नहीं है, तू पढ़, जब तक बाबा हैं, हमारा घर चलता रहेगा।
अज्जो कहती हैं कि अगर हो पाता है तो कभी-कभार घर में खाना बना लेती हूं।
पुजारी भी नहीं रखते शंकराचार्य से इत्तफाक
द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती भले ही यह कह रहे हैं कि शिरडी के साईं बाबा की पूजा नहीं करनी चाहिए।
बाबा हिंदुओं को बांट रहे हैं, लेकिन साईं बाबा में आस्था रखने वाले ऐसा नहीं मानते। यही नहीं हिंदू मंदिरों से जुड़े पुजारी भी शंकराचार्य की बात से सहमत नहीं हैं।
साईं बाबा सबको साथ लेकर चलते हैं। उन्होंने कभी हिंदुओं को बांटने का काम नहीं किया। जिसकी उन पर श्रद्धा है, वह उनकी पूजा करे तो इसमें गलत क्या है? हिंदू धर्म में बाबा का विशेष स्थान है। - दिगंबर भरत गिरी, मुख्य पुजारी, टपकेश्वर मंदिर
आस्था और श्रद्धा के विषयों में विवाद उचित नहीं है। बाबा को अच्छे व्यक्ति के रूप में मानना गलत नहीं है। लेकिन उन्हें राम या कृष्ण के समकक्ष खड़ा कर देना उचित नहीं है। संतों को भगवान का स्थान नहीं दिया जा सकता है। - आचार्य बिपिन जोशी, मुख्य पुजारी, माता वैष्णो देवी गुफा मंदिर
शहर का सबसे पुराना साईं मंदिर
राजपुर रोड स्थित साईं बाबा का मंदिर शहर का सबसे पुराना साईं मंदिर है। दून में इसके बाद ही दूसरे साईं मंदिर बने हैं। राजपुर रोड स्थित साईं मंदिर की स्थापना वर्ष 1994 में ऊषा भल्ला ने की थी।
साईं मंदिर के पुजारी पंडित विनोद कुमार झा ने बताया कि ऊषा भल्ला को स्वप्न में साईं बाबा ने दर्शन दिए थे। इसके बाद उन्होंने साईं मंदिर की स्थापना कराई।
भल्ला की मृत्यु के बाद उनके पति केदारनाथ भल्ला और उनकी दूसरी पत्नी रीता भल्ला साईं मंदिर की देखरेख कर रहे हैं। यहां प्रतिदिन भंडारा होता है। सुबह से शाम तक बाबा की पांच बार आरती होती है।
पुजारी ने बताया कि हर राज्य में बाबा के श्रद्धालु हैं, जो यहां आते हैं। बृहस्पतिवार को बाबा का विशेष श्रृंगार, पूजन और भंडारे का आयोजन किया जाता है।
इन दिनों मसूरी, हरिद्वार और ऋषिकेश आदि जगहों पर घूमने के लिए दूसरे प्रदेशों से लोग आ रहे हैं। इनमें से कई लोग राजपुर रोड स्थित साईं बाबा के मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
बाबा पर निष्ठा और विश्वास ही है कि घूमने आए लोग साईं मंदिर में दर्शन करने भी आ रहे हैं। बिजनौर के धामपुर से आए संजय चौहान ने बताया कि दून के साईं बाबा मंदिर के बारे में बहुत सुना था।
यहां आना हुआ तो परिवार के साथ बाबा के दर्शन के लिए पहुंच गए। अमृतसर से आए राजीव सेठ परिवार के साथ मंदिर पहुंचे थे।
उन्होंने बताया कि हरिद्वार आए थे तो यहां बाबा के दर्शन के लिए भी आ गए। यहां आने वाले कई श्रद्धालुओं से बातचीत की गई तो लगभग सभी का यही कहना था कि साईं बाबा ने कभी हिंदुओं को नहीं बांटा।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित विनोद कुमार झा ने बताया कि प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग साईं बाबा के दर्शन के लिए आते हैं। बाबा के बारे में ऐसी गलत बात का हम विरोध करते हैं।