कारगिल युद्ध के दौरान एक मिशन में भेजे गए हल्द्वानी के प्रेम प्रकाश पंत की आंखें इस मिशन की भेंट चढ़ गईं। श्री पंत को अब बिल्कुल नहीं दिखाई देता है। आज भी देशभक्ति का जज्बा ऐसा कि बताने को राजी नहीं कि सेना का मिशन क्या था।
बहुत कुरेदने पर बोले कि रेतीले क्षेत्र में गए थे, जहां से लौटने के बाद एक साल के भीतर दोनों आंखों की रोशनी चली गईं। अब वह ब्रेल लिपि से समाज कल्याण विभाग में 2006 से बतौर टेलीफोन और फैक्स ऑपरेटर काम कर रहे हैं।
प्रदेश सरकार उन्हें 2011 में विकलांगता पुरस्कार से सम्मानित भी कर चुकी है। एयरफोर्स के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रेम प्रकाश पंत जूनियर वारंट आफिसर के पद पर वर्ष 1981 में भर्ती हुए थे।
कारगिल युद्ध के दौरान जैसलमेर में एक माह तक रहे और एक मिशन के दौरान उनकी आंखों में इंफेक्शन हो गया। एक वर्ष के भीतर ही दोनों आंखें चली गईं। 20 साल देश की सेवा करने के बाद वर्ष 2001 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्त ले ली।