उत्तराखंड के श्रीगर शहर की दक्षिणी पहाड़ी पर हुए जबर्दस्त भूस्खलन ने खतरे की घंटी बजा दी है। पहाड़ी से गिरे टनों वजनी बोल्डरों ने दर्जनों पेड़ों को धराशायी कर दिया।
खुशकिस्मती से बोल्डर संकरी घाटी में फंसकर रह गए वरना डाकबंगला क्षेत्र में भारी जान-माल का नुकसान हो सकता था।
जोरदार आवाज के साथ भूस्खलन
मंगलवार सुबह छह बजे आवास-विकास कालोनी और हैप्रेक के बीच पहाड़ी पर जोरदार आवाज के साथ भूस्खलन हुआ। लोग घरों से बाहर निकल आए। इसके बाद भी धमाकों की कई आवाजें सुनाई दी।
दो घंटे बाद कोहरा छंटते ही पहाड़ी पर भूस्खलन दिखाई दिया। घना जंगल होने के कारण इसकी गंभीरता का अंदाजा नहीं है, जबकि स्थिति काफी विस्फोटक है।
दर्जनों पेड़ धराशायी
भूस्खलन के कारण पहाड़ी से टनों वजनी बोल्डर और मलबा एक किमी नीचे तक फैले हैं। बोल्डरों की चपेट में आने से दर्जनों पेड़ धराशायी हो गए।
खुशकिस्मती से आगे संकरी घाटी होने कारण बस्ती से महज 200 मीटर दूर ही मलबा अटक गया वरना बड़ा हादसा हो सकता था। अब यहां बारिश के दौरान खतरा बढ़ गया है। इसके कारण निरंजनी बाग, बांसबाड़ा, कोठड़ और डाकबंगला जैसे एक किमी दायरे की बस्तियों को गंभीर खतरा हो गया है।
अस्सी के दशक में ही बताया था संवेदनशील
गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग ने बुघाणी रोड के ऊपर के क्षेत्र को संवेदनशील घोषित किया था। पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सी प्रसाद और उनकी टीम ने 80 के दशक में इस संबंध में विस्तृत भूगर्भीय रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंपी थी।
इस रिपोर्ट में डाक बंगले से लेकर बिड़ला परिसर के छात्रावास तक के क्षेत्र को संवेदनशील बताते हुए किसी भी तरह के निर्माण के लिए असुरक्षित घोषित किया था। मगर आज यहां अंधाधुंध मकान बन चुके हैं। खुद विश्वविद्यालय का म्यूजियम, ग्लास हाउस, हैप्रेक और गेस्ट हाउस इसी क्षेत्र में है।
निर्माण कार्यों पर लगे रोक
बुघाणी रोड के ऊपर का करीब दो किमी का क्षेत्र संवेदनशील है। इसके लिए पुरानी रिपोर्टों का संज्ञान लेना बेहद जरूरी है। यहां पर हो रहे अंधाधुंध निर्माण कार्यों पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए। वरना स्थितियां और भी खराब हो सकती हैं।
- डा. एमपीएस बिष्ट, भू-विज्ञान विभाग, एचएनबी विश्वविद्यालय।