कथित स्टिंग ऑपरेशन के मामले में शुक्रवार को आईएएस अफसर मोहम्मद शाहिद को आबकारी, सुराज भ्रष्टाचार निवारण व सूचना जनसंपर्क विभाग के सचिव और सीएम के सचिव पद से हटा दिया गया।
चारों विभागों से कार्यमुक्त किए जाने की पुष्टि करते हुए मुख्य सचिव एन रविशंकर ने कहा कि शाहिद ने इसके लिए अनुरोध किया था। शाहिद के पास अब केवल अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ही रहेगा। माना जा रहा है कि शाहिद के इस कदम से भाजपा के आक्रामक तेवर और पार्टी के अंदर सक्रिय हुई विरोधी ताकतों के भारी दबाव से सीएम को राहत मिलेगी।
शाहिद ने पत्र लिखा था कि अशोक पांडेय नाम के किसी व्यक्ति ने बुधवार को दिल्ली में प्रेसवार्ता करके आबकारी ठेकों के संबध में एक सीडी जारी की थी। इसे बाद इसे कुछ इलेक्ट्रानिक चैनलों पर भी दिखाया गया।
पत्र में उन्होंने सीडी की विषय वस्तु का खंडन करते हुए लिखा कि चूंकि विषय आबकारी विभाग से जुड़ा हुआ है और शासन इस पूरे प्रकरण की जांच करवाना चाहता है, लिहाजा उन्हें संबंधित विभागों से कार्यमुक्त करना उचित होगा। इससे सरकार की विश्वसनीयता और जांच की निष्पक्षता दोनों ही बनी रहेगी।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पहले घिरी और अब आक्रामक हुई भाजपा ने स्टिंग ऑपरेशन आम होने के बाद से सीएम सचिव शाहिद के साथ सीएम हरीश रावत को भी निशाने पर लिया था। लेकिन सीएम जिद पर अड़े थे कि वे सीडी की वास्तविकता (फोरेंसिक जांच) जाने बिना वे शाहिद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेंगे।
उनके इस स्टैंड ने भाजपा के विरोध को ताकत दे दी थी, सीएम रावत को भ्रष्टाचार में लिप्त बताते हुए भाजपाई धरना-प्रदर्शन में जुट गए थे। माना जा रहा है कि इस बदले हुए घटनाक्रम में भाजपाइयों की रणनीति को झटका लगेगा। उन्हें नए सिरे से रणनीति बनानी होगी।