नसबंदी के एवज में 25 साल बाद भी आवंटित आवासीय प्लाट पर कब्जा नहीं मिलने से नाराज नसबंदी कराने वालों ने 30 जून को सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी दी है।
आरोप है कि तहसील प्रशासन ने मिलीभगत कर आवंटित सरकारी भूमि माफिया के नाम दर्ज कर दी है और जांच के नाम पर उन्हें तहसील के चक्कर लगवाए जा रहे हैं।
नसबंदीधारकों का कहना है कि 1992 में उप्र सरकार की परिवार नियोजन के तहत नसबंदी कराने पर प्रत्येक को आवासीय प्लाट की योजना लागू की थी। उस समय ऋषिकेश के 19 लोगों ने नसबंदी कराई थी। वर्ष 1994 में परगनाधिकारी दून ने तीन-तीन बिस्वा भूमि आवंटित की थी, जिस पर अभी तक पात्र नसबंदीधारकों को कब्जा नहीं मिल सका है।
नसबंदीधारकों का आरोप है कि तत्कालीन सर्वे नायब तहसीलदार ने सभी दस्तावेज गायब कर दिए और आवंटित भूमि की खतौनी में फर्जी आदेश दर्ज कर सरकारी संपत्ति को भूमाफिया के नाम अंकित कर दिया। स्थानीय प्रशासन लंबे समय से जांच के नाम पर उन्हें चक्कर कटवा रहा है।