उत्तराखंड के कई पर्वतीय जनपदों में ज्यादातर पुरुषों में एक भ्रम ने राष्ट्रीय कार्यक्रम के मकसद पर पलीता लगा दिया है।
पुरुषों को लगता है कि यदि वे नसबंदी कराएंगे तो उनमें मर्दानगी ताकत कम हो जाएगी। उनके इस डर ने स्वास्थ्य महकमे की नींद उड़ा दी है और अब वह नए सिरे से जागरूकता अभियान चलाने की सोच रहा है। इस साल नसबंदी के जो आंकड़े उसने जुटाएं हैं, वे बेहद हताश करने वाले हैं।
एक जिला ऐसा जहां कोई नहीं पहुंचा नसबंदी कराने
रिपोर्ट के अनुसार, टिहरी, चंपावत जैसे जिलों में एक से दो व्यक्ति की बमुश्किल नसबंदी हो पा रही है। इन दोनों जिलों में साल-दर-साल यही स्थिति देखने को मिल रही है। रुद्रप्रयाग जिले में इस वित्तीय वर्ष में एक भी पुरुष ने परिवार नियोजन (नसबंदी) नहीं कराई।