2020-21 में सबसे ज्यादा बंदरों की नसबंदी
वन विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020-21 में सबसे अधिक 19 हजार 961 बंदर पकड़े गए। इनमें से 18 हजार 501 बंदरों की नसबंदी की गई, जबकि इस साल सितंबर तक सात हजार 771 बंदरों को पकड़ा जा चुका है, जबकि दो हजार 647 बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है।
तीन बंदरबाड़ों में होती नसबंदी
राज्य में तीन बंदरबाड़े बनाए गए हैं, जहां नसबंदी की जाती है। इनमें पहला चिड़ियापुर (हरिद्वार वन प्रभाग), दूसरा अल्मोड़ा (सिविल सोयम अल्मोड़ा वन प्रभाग) और तीसरा रानीबाग (नैनीताल वन प्रभाग) में है।
वर्ष 2015 में ज्यादा थे बंदर और लंगूर
इससे पूर्व बंदरों और लंगूरों की गणना 2015 में की गई थी। तब राज्य में 1,46,432 बंदर और 54,804 लंगूरों की रिपोर्ट की गई थी।
वन विभाग की ओर से कई स्तरों पर किया जा रहा काम
प्रदेश में बीते 10 सालों से बंदरों की नसबंदी का काम किया जा रहा है। पहले के मुकाबले इनकी संख्या में 25 प्रतिशत तक की कमी आई है। बंदरों को जंगलों में रोकने के लिए वन विभाग की ओर से कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इसके सकारात्मक परिणाम दिखाई देंगे।
- डॉ. समीर सिन्हा, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, उत्तराखंड वन विभाग
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बंदरों से परेशान आपदा प्रबंधन विभाग
राज्य सचिवालय परिसर में स्थित उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग भी बंदरों की धमाचौकड़ी से परेशान है। विभाग के कार्यालय से लगता एक बाग है, जहां बंदर बैठे रहते हैं। साथ ही कार्यालय परिसर में दिनभर बंदरों की धमाचौकड़ी रहती है। कार्यालय का दरवाजा खुला रहने पर कई बार बंदर घुस जाते हैं। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिशासी निदेशक पीयूष रौतेला ने बताया कि वह शीघ्र ही वन विभाग को पत्र लिखने जा रहे हैं।