लोकसभा चुनाव से ठीक पहले प्रदेश के 10 हजार स्टांप विक्रेताओं को बड़ा झटका लगा है।
छपाई पर गुपचुप तरीके से रोक
ई-स्टांपिंग को बढ़ावा देने के मकसद से नए स्टांप पेपरों की छपाई पर गुपचुप तरीके से रोक लगा दी गई है। दून समेत प्रदेश की विभिन्न कचहरियों में स्टांप पेपरों की किल्लत बढ़ने के बाद यह बात सामने आई है।
वित्त सेवाएं रमेश चंद्र अग्रवाल ने स्टांप नोडल डिपो हरिद्वार को भेजे आदेश में कहा है कि मैनुअल स्टांपों की आपूर्ति के लिए डिमांड की जरूरत नहीं है। मैनुअल बिक्री धीरे-धीरे खत्म की जानी है।
स्टांप पेपरों की बिक्री का मैनुअल तरीका वर्ष 1899 से चला आ रहा है। कोषागार निदेशालय के इस आदेश से स्टांप विक्रेताओं में खलबली है।
एक से दो फीसदी मिलता है कमीशन
स्टांप विक्रेताओं को वर्ष 1899 से स्टांप बिक्री पर तय मूल्य का एक फीसदी कमीशन मिलता है। वर्ष 2011 में हुए संशोधन के बाद दस रुपए से एक हजार रुपए तक के स्टांप में कमीशन को दो फीसदी किया गया।
एक हजार रुपए से अधिक के स्टांप पेपरों पर यह कमीशन एक फीसदी है।
यह है ई-स्टांपिंग
प्रदेश सरकार ने एक कंपनी को ई-स्टांपिंग के लिए अधिकृत किया है। कंपनी हर कचहरी में कुछ एजेंट रखेगी। इंटरनेट पर कंपनी अलग-अलग मूल्यों के स्टांप पेपरों का नमूना तैयार करेगी।
एजेंट खास कोड और पासवर्ड की मदद से लॉग इन करने के बाद इन नमूनों का प्रिंटआउट निकालकर ग्राहक को देंगे। एजेंट को कमीशन देकर बाकी रकम कंपनी के खाते में जाएगी।
भाजपा शासन में शुरू हुई प्रक्रिया
प्रदेश में पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में ई-स्टांपिंग के लिए स्टॉक होल्डिंग कारपोरेशन इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआईएल) के साथ पांच साल का एग्रीमेंट किया गया था। हालांकि, तब यह व्यवस्था दी गई थी कि कंपनी ई-स्टांपिंग का काम करेगी, जबकि मैनुअल बिक्री जारी रहेगी।
छत न जगह, कहां लगाएं कंप्यूटर
स्टांप विक्रेता एसोसिएशन के सचिव आशुतोष ने बताया कि प्रदेश भर के स्टांप विक्रेता इस निर्णय का विरोध करेंगे। पहले ही स्टांप विक्रेताओं के हितों की अनेदखी होती रही है, अब रोजगार छीनने की कोशिश हो रही है।
आशुतोष के मुताबिक महाराष्ट्र स्थित एसएचसीआईएल कंपनी ने स्टांप विक्रेताओं को ई-स्टांपिंग के लिए एजेंट बनने का आफर दिया है। इसमें शर्त रखी गई है कि विक्रेता अपना कंप्यूटर, प्रिंटर और इंटरनेट कनेक्शन रखें।
आशुतोष का कहना है कि कचहरी परिसरों में स्टांप विक्रेताओं को ठीक से बैठने की जगह नहीं मिलती। कहीं पेड़ के नीचे तो कहीं खुले में स्टांप बिक्री की जाती है।
ऐसे में कंप्यूटर कहां लगाएं? उस पर कंपनी ने हर स्टांप पर सिर्फ 0.15 प्रतिशत कमीशन देने की बात कही है। इससे तो कनेक्शन, बिजली, प्रिंटिंग का खर्चा भी नहीं निकलेगा।