सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में शनिवार को 116 सहायक सेनानायक शामिल हो गए हैं। यहां एसएसबी अकादमी में हुई पासिंग आउट परेड के बाद नव प्रशिक्षु सहायक सेनानायकों ने सेवा, सुरक्षा और बंधुत्व की शपथ ली। मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने एसएसबी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पंचवर्षीय योजना में इसके लिए 660 करोड़ की धनराशि रखी गई है।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने सलामी
अकादमी परिसर में नवनिर्मित परेड ग्राउंड में आयोजित पासिंग आउट परेड की सलामी मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री रंजीत प्रताप नारायण सिंह ने ली। उन्होंने कहा कि एसएसबी के लिए आधुनिक सुविधाएं एवं तकनीक जुटाने के साथ ही सौर ऊर्जा, प्रशिक्षण, चिकित्सा समेत सभी क्षेत्रों में खास ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए पंचवर्षीय योजना के तहत 660 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। उन्होंने आपदा के बावजूद सहायक सेनानायकों के अब तक के सबसे बड़े बैच के पास आउट होने पर अकादमी निदेशक को बधाई दी। कहा कि चुनौतियों से पार पाने के लिए संयम और लक्ष्य की जरूरत होती है, जिसे एसएसबी ने पूरा कर दिखाया है।
सेनानायकों के हौसले की चर्चा
बल मुख्यालय के अतिरिक्त महानिदेशक आरसी तायल ने कहा कि एसएसबी ने आपदा के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में भी कार्य किया, जो काबिले तारीफ है। निदेशक एस बंदोपाध्याय ने प्रशिक्षण के दौरान आई मुश्किलों का जिक्र करते हुए नव प्रशिक्षु सहायक सेनानायकों के बुलंद हौसलों की चर्चा की। बताया कि नव प्रशिक्षितों को तैराकी, घुड़सवारी, रॉक क्लाइंबिंग, एडवेंचर टूर, राफ्टिंग का प्रशिक्षण दिया गया।
इस मौके पर विधायक गणेश गोदियाल, गढ़वाल विवि कुलपति प्रो. एसके सिंह, जिलाधिकारी चंद्रेश कुमार यादव, उपजिलाधिकारी रजा अब्बास, कांग्रेस नगर अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह नेगी, गणेश भट्ट आदि मौजूद थे। संचालन डा. राकेश भट्ट ने किया।
पत्रिका, वेबसाइट का किया लोकार्पण
एसएसबी सहायक सेनानायकों की पीओपी में पहुंचे मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री रंजीत प्रताप नारायण सिंह ने अकादमी की पत्रिका अलकनंदा के छठे संस्करण और वेबसाइट का लोकार्पण किया।
दुश्मनों से लड़ना मुश्किल नहीं : सुनील कुमार
स्वार्ड ऑफ ऑनर पाने वाले सुनील कुमार दिल्ली पुलिस में डेढ़ वर्ष तक रहने के बाद सीधी भर्ती परीक्षा से बैच 2010 में चुने गए। उनका कहना है कि दुश्मनों से टक्कर लेना किसी भी सैनिक के लिए मुश्किल नहीं, क्योंकि उसे मालूम होता है कि दुश्मन को गोली ही मारनी है। एसएसबी का आम जनता से सीधा संपर्क होता है, इसलिए मैंने एसएसबी को ही पहली पसंद में रखा।
सहायक सेनानायकों का था बड़ा बैच
वर्ष 2004 में एसएसबी अकादमी की स्थापना के बाद से उत्तर प्रदेश से 40, बिहार से 27, राजस्थान से 16, दिल्ली से 5, हरियाणा से 6, मणिपुर से 3, उत्तराखंड से 6, झारखंड से 4, कर्नाटक से 3, चंडीगढ़, जम्मू, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र से एक-एक नव प्रशिक्षु अधिकारी शामिल थे।