श्रीनगर और बाजपुर नगर पालिका परिषदों के चुनाव के लिए तैयारी तेज हो गई है। सरकार की मंशा हाईकोर्ट के आदेशानुसार 15 जुलाई से पहले दोनों जगह चुनाव करा देने की है। राज्य निर्वाचन आयोग की अपनी तैयारियां हैं। इन स्थितियों के बीच, सियासी दल भी चुनावी चुनौती के लिए चौकन्ने होने लगे हैं। दोनों ही निकायों के चुनाव दिलचस्प होने की उम्मीद है।
इसकी वजह ये है कि त्रिवेंद्र सरकार के दो मंत्रियों यशपाल आर्य और धन सिंह रावत के गृह क्षेत्र में ये चुनाव होने जा रहे हैं, जहां न चाहते हुए भी दोनों मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर रहेगी। वर्ष 2018 में हुए नगर निकाय चुनाव में मेयर/अध्यक्ष के पदों पर भाजपा ने 35, तो कांग्रेस ने 25 जगह जीत हासिल की थी। सबसे अहम कुर्सी पर कब्जा करके भाजपा और कांग्रेस दोनों ही नगर निकायों में जीत के अपने आंकडे़ को और समृद्ध करना चाहती हैं। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के अनुसार, सरकार हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए जल्द से जल्द दोनों जगह चुनाव कराने जा रही है।
आर्य और रावत को लगानी पड़ेगी पूरी ताकत
इन दो नगर निकायों में चुनाव की तारीख जब भी तय हो, मगर यशपाल आर्य और धन सिंह रावत को चुनाव में पूरी ताकत झोंकनी पडे़गी। समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य बाजपुर से विधायक हैं। इसी तरह उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत विधानसभा में श्रीनगर का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों मंत्रियों की भूमिका इसलिए अहम हो जाती है कि 2018 में हुए निकाय चुनाव में कई अहम सीटों को भाजपा ने गंवा दिया था। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के गृह क्षेत्र डोईवाला में भाजपा चुनाव हार गई थी। इसी तरह, वन मंत्री डा हरक सिंह रावत कोटद्वार और शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक हरिद्वार में भाजपा की नैया पार नहीं लगा पाए थे। जहां तक भंग बोर्ड की बात है, बाजपुर में अध्यक्ष पद कांग्रेस के पास था, जबकि श्रीनगर में निर्दलीय ने पिछले पांच वर्ष नगर पालिका की कमान संभाली थी।
श्रीनगर महिला और बाजपुर सामान्य होगी सीट
शहरी विकास विभाग ने श्रीनगर नगर पालिका अध्यक्ष की सीट को महिला आरक्षित घोषित किया है, जबकि बाजपुर सामान्य सीट रहेगी। संबंधित अधिसूचना पर आज कल आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। इसके बाद इन पर सुनवाई की जाएगी। यह प्रक्रिया पूरी होते ही दोनों सीटों के आरक्षण पर अंतिम अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।