देहरादून में जन्माष्टमी का त्योहार दो दिन मनाया जाएगा। तिथि के अनुसार यह त्योहार 17 अगस्त को मनाया जाएगा, तो नक्षत्र के अनुसार पर्व मनाने वाले 18 अगस्त को जन्माष्टमी मनाएंगे।
कुछ मंदिर दोनों ही दिन त्योहार की धूम रहेगी। भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र, अष्टमी तिथि और बुधवार को हुआ था।
अष्टमी तिथि 17 अगस्त को सुबह छह बजकर पांच मिनट पर लगेगी और 18 अगस्त को सुबह इसी समय तक रहेगी। 17 को सुबह 10.42 से कृतिका नक्षत्र लगेगा जो कि 18 को सुबह 11.40 बजे तक रहेगा। इसके बाद रोहिणी नक्षत्र लगेगा।
पंडितों का अपना-अपना तर्क
उत्तराखंड विद्वत सभा के उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी ने बताया कि धर्मसिंधु ग्रंथ के अनुसार जो रात्रि अष्टमी व्यापिनी रहती है।
उसी रात को व्रत करना चाहिए। ऐसे में 17 अगस्त को व्रत रखना चाहिए। डॉ. आचार्य सुशांत राज के अनुसार भगवान का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। ऐसे में नक्षत्र के हिसाब से चलने वाले लोग 18 को पर्व मना सकते हैं।
कहां-कब पर्व
कालिका माता मंदिर - 18 अगस्त
श्री पृथ्वीनाथ मंदिर - 17 को व्रत, 18 को रासलीला
श्री श्याम सुंदर मंदिर - 18 अगस्त
गीता भवन - 17 अगस्त
सुंदर झांकियां रहेंगी आकर्षण का केंद्र
श्री पृथ्वीनाथ मंदिर के संजय गर्ग ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान डमरू पर शंकर जी और कढ़ाई में प्रह्लाद दिखाई देंगे। इसके साथ ही 18 अगस्त को भव्य रासलीला का आयोजन होगा।
कालिका माता मंदिर में पहली बार खाटू श्याम और बांके बिहारी रूप की झांकी सजेगी। झांकी की व्यवस्था देख रहे प्रमोद श्रीवास्तव ने बताया कि कान्हा बांके बिहारी रूप में एकदम काले दिखाई देंगे।
इसके साथ ही गोवर्धन पर्वत, माखन खेर, राधाकृष्ण झूला आदि झांकियां होंगी। गीता भवन में 15 से 17 अगस्त तक रासलीला का आयोजन किया जाएगा।