जन्माष्टमी इनके लिए सिर्फ कान्हा का जन्मदिन नहीं है। यह दिन उन्हें ममता का वह अहसास दिलाता है, जिसके लिए वे साल भर इंतजार करती हैं।
कृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल को संतान मान चुकीं देहरादून की महिलाओं ने सोमवार को जन्माष्टमी खास अंदाज में मनाई।
इस मौके पर लड्डू गोपाल को नए कपड़े पहनाए गए, खास श्रृंगार करने के बाद जाप भी किया गया। जन्माष्टमी को इन गैरशादीशुदा महिलाओं ने बेटे के जन्मदिन के तौर पर मनाया।
कटता केक, बंटती मिठाई
त्यागी रोड पर रहने वाली मधु गुप्ता को लड्डू गोपाल घर लाए 22 वर्ष हो चुके हैं। मधु उनका जन्म दिन सावन के आखिरी शनिवार को मनाती हैं। इस दिन बाकायदा केक काटा जाता है और मिठाई बंटती हैं।
खुशी में शामिल होने आस-पड़ोस के लोग भी रिश्तेदार समेत पहुंचते हैं। तीन साल पहले मधु इनकी शादी भी करवा चुकी हैं।
इस दिन वेडिंग पॉइंट में शानदार तरीके से पार्टी हुई और पड़ोस के घर की बेटी (रुकमणी देवी के प्रतीक रूप) के साथ लड्डू गोपाल की शादी कराई।
मधु ने बताया कि अब ‘बहू’ आ गई है तो तीनों पर्व की खुशियां साथ मनाते हैं। जन्माष्टमी पर मैंने लड्डू गोपाल को नए कपड़े पहनाए और अपने हाथों से प्रसाद खिलाया।
चार वर्ष की उम्र में मान लिया था बेटा
महज चार साल की उम्र में पूर्व जिला संरक्षण अधिकारी रमिंद्री मंद्रवाल ने कान्हा को अपना बेटा मान लिया। वह हर साल जन्माष्टमी यही सोचकर मनाती हैं कि लड्डू गोपाल अभी पैदा हुए हैं।
रमिंद्री ने बताया कि जन्माष्टमी पर वह रात नौ से बारह बजे तक कान्हा के साथ बैठती हैं। दूध-दही से अभिषेक के साथ ही तीन घंटे तक उनका जाप करती हैं। रमिंद्री ने भी शादी नहीं की है। हालांकि वह अपने पूरे परिवार के साथ यह पर्व मनाती हैं।ं