उत्तराखंड को राष्ट्रीय खेलों की जो मेजबानी मिली
उत्तराखंड ओलंपिक संघ के सचिव डीके सिंह का कहना है, उत्तराखंड देवभूमि और वीरभूमि के नाम से जाना जाता है। सेना में राज्य के सबसे अधिक जवान अपनी शहादत देते हैं। देवभूमि, वीरभूमि के साथ ही राज्य खेल भूमि के रूप में भी जाना जा सके इसके लिए विदेशी कोच हो या फिर कोई अन्य व्यवस्था सभी संभावनाओं को तलाशा जाना चाहिए। उन्होंने कहा प्रयास किया जाना चाहिए कि उत्तराखंड को राष्ट्रीय खेलों की जो मेजबानी मिली है उसमें राज्य के खिलाड़ी अधिक से अधिक पदक जीत सकें।
राज्य में अधिकतर पदों पर संविदा पर हैं खेल प्रशिक्षक
राज्य में अधिकतर पदों पर संविदा पर खेल प्रशिक्षक तैनात हैं। हालांकि विभाग ने पूर्व में 60 खेल प्रशिक्षक के पदों के लिए नियुक्ति निकाली, लेकिन विभाग को मात्र 28 खेल प्रशिक्षक मिले।
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मुख्यमंत्री खेल विकास निधि के प्रस्ताव को पिछली कैबिनेट में मंजूरी मिल चुकी है। उसमें व्यवस्था है किसी खिलाड़ी को यदि विदेशी कोच की जरूरत है तो उसके लिए इसे उपलब्ध कराया जाएगा। -जितेंद्र सोनकर, अपर सचिव एवं खेल निदेशक