दूध विक्रेताओं पर खाद्य सुरक्षा विभाग की खास मेहरबानी है। तमाम शिकायतों के बावजूद विभाग मिलावटी दूध बेचने वालों पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। पिछले छह वर्षों में काशीपुर और रुद्रपुर में दूध के मात्र 25 नमूने भरे गए हैं। इस अवधि में सिर्फ पांच दूध विक्रेताओं के खिलाफ दस-दस हजार रुपये जुर्माने की कार्रवाई हुई है। यह खुलासा आरटीआई के तहत हुआ है।
कुंडा थाने के ग्राम मिस्सरवाला निवासी आरटीआई कार्यकर्ता आसिम अजहर ने 26 फरवरी 2019 को आरटीआई के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग से जिले की दो तहसीलों रुद्रपुर और काशीपुर में दोपहिया वाहनों से घर-घर दूध बेचने वालों के संबंध में पांच बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। इसमें दूधियों के पंजीकरण, निर्गत लाइसेंस की संख्या और दूध के नमूने और जुर्माने की कार्रवाई के संबंध में जानकारी मांगी गई थी। इस संबंध में खाद्य संरक्षा विभाग के लोकसूचना अधिकारी/अभिहित अधिकारी ने दी सूचना में बताया कि 2013 से अब तक रुद्रपुर में 81 और काशीपुर में 280 दूध विक्रेताओं का पंजीकरण किया गया है।
इस अवधि में दूध विक्रेताओं के रुद्रपुर में 15 और काशीपुर में मात्र 10 नमूने ही भरे गए। काशीपुर और रुद्रपुर में पंजीकृत 361 दूध विक्रेताओं में से 352 दूधियों ने अपना नवीनीकरण नहीं कराया है। इस दौरान दोनों स्थानों पर कुल 25 नमूने लिए गए। इनमें से पांच नमूने फेल हुए। दूध में मिलावट पाए जाने पर अली मोहम्मद निवासी ग्राम नूरपुर, तहसील स्वार जिला रामपुर, खलील अहमद निवासी ग्राम सकरोरा, तहसील बिलासपुर जिला रामपुर, परवेज आलम निवासी कनौरी सुल्तानपुर पट्टी, बाजपुर, गुलाम हुसैन ग्राम लम्बाखेड़ा, तहसील गदरपुर व ग्राम बुढ़ानपुर निवासी कासम पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।