सवाल : सांस संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं, इसकी मुख्य वजह क्या है?
जवाब : धूम्रपान की प्रवृत्ति, बढ़ता इंडोर और आउटडोर एयर पॉल्यूशन और तेजी से बदलता मौसम भी मुख्य वजह हैं।
सवाल : दोनों तरह के पॉल्यूशन में क्या अंतर है?
जवाब : चूल्हे पर खाना बनाने के लिए लकड़ी का प्रयोग करना, किचन में क्रास वेंटिलेशन न होने आदि से धुआं सांस की नलियों में चला जाता है। लगातार लंबे समय तक ऐसा होने से सांस की बीमारी की संभावना बढ़ती है। यह इंडोर पॉलयूशन में आता है।
फैक्ट्रियों और ईंधन युक्त वाहनों से निकलने वाला धुआं, जिसमें कार्बन डाई ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइ ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक रासायनिक पदार्थ निकलते हैं। सांस की नली के 90 प्रतिशत रोग इससे होते हैं। अचानक मौसम की बदलने की परिस्थितियां भी इसकी वजह हैं।
सवाल : एक्सरसाइज, योग और व्यायाम कितना फायदेमंद होता है?
जवाब : इनका सांस रोगों का कम करने में बड़ा योगदान है। ब्रीथिंग एक्सरसाइज, प्राणायाम आदि बहुत जरूरी है। ठंड से बचकर सुबह खुली हवा या क्रास वेंटिलेशन वाले कमरे में इन एक्सरसाइज को करने सांस की नलियों को फायद मिलता है।
सवाल : एल्कोहॉल का अधिक सेवन कितना खतरनाक है?
जवाब : सांस रोगों से सीधा संबंध तो नहीं है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से एल्कोहॉल के अत्यधिक सेवन से छाती के कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है। ऐसे में संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।
ठंड में अस्थमा, अस्थमा का अटैक जैसी सांस व फेफड़ों की यह दिक्कत बढ़ जाती है। ठंड में वायरस का संक्रमण, ठंडी हवा से फेफड़ों में सिकुड़न बढ़ जाती है।
अत्यधिक ठंडी हवा अंदर जाकर सांस की नलियों में सिकुड़न पैदा करती है। इससे सूजन भी हो जाती है। अत्यधिक ठंड में सुबह टहलने से परहेज करें। सूरज निकलने के बाद ही पूरे शरीर को अच्छी तरह से ढककर बाहर निकलें। बुजुर्ग लोग इसका खास ख्याल रखें।
असंतुलित खानपान भी बढ़ा रहा दिक्कत
असंतुलित खानपान भी सांस रोग को बढ़ा रहा है। दरअसल, अत्यधिक जंक फूड व फैटी डाइट लेने से इंसान फल, सब्जी आदि पौष्टिक भोजन नहीं ले पाता। जिससे शरीर में प्रोटीन की मात्रा और इम्यूनिटी पावर भी घटती है। इससे मोटापा भी बढ़ता है। अन्य बीमारियों की तरह इंसान को सांस का संक्रमण भी आसानी से हो जाता है।
- धूम्रपान, तंबाकू, शराब जैसे नशे को पूरी तरह से छोड़ दें।
- घर में चूल्हे पर लकड़ी या कोयले की आग के बजाय एलपीजी घरेलू गैस या इलेक्ट्रिक साधनों का इस्तेमाल करें।
- रसोईघर में वेंटिलेशन के लिए प्रॉपर व्यवस्था हो।
- व्हेकिल और फैक्ट्रियों के पॉल्यूशन से बचें और इलेक्ट्रिक वाहन की तरफ जाएं।
- इंफ्लूएंजा का वैक्सीन जरूर लगाएं। एक वैक्सीन प्रत्येक पांच साल में लगता है।
- कफ एटीकेट्स का ध्यान रखें।
- एक बीमार व्यक्ति से सामान्य व्यक्ति को भी संक्रमण हो सकता है।
- धूल और अस्पताल आदि स्थानों पर मास्क पहन कर रखें।
- जहां प्रदूषण की मात्रा बहुत अधिक रहती है वहां जाने से बचें।
- प्रोटीन डाइट लें, फैटी डाइट न लें, दाल, रोटी, चावल, फल सब्जी आदि संतुलित आहार लें।