माना जा रहा है कि रावत भी इसी तरह से नाराज हैं। समर्थक कह रहे हैं कि रावत सीधे ही सक्रिय राजनीति में रहने या न रहने पर गंभीर चिंतन की बात कर प्रदेश में कांग्रेस की सियासत में अपनी अनुपस्थिति में उपस्थिति दर्ज करवा रहे है।
रावत के आलोचकों का कहना है कि रावत ने इस पोस्ट में अपने बेटे का जिक्र कर मामले को हल्का कर दिया। खुद रावत इस पोस्ट में लिख रहे हैं कि मै उत्तराखंड को अपने आपको हरीश रावत के रूप में याद किए जाने के लिए मजबूर करूंगा। साफ है कि रावत किसी न किसी रूप से सक्रिय तो रहेंगे ही।
लिखना अभी जारी है...
रावत ने इस पोस्ट में अभी अपनी चिंतन प्रक्रिया को साझा करने के लिए लिखना जारी रखने का एलान भी किया है। अब कांग्रेस को पार्ट टू का इंतजार है। नेता प्रतिपक्ष डा.इंदिरा हृदयेश ने पूछे जाने पर टिप्पणी से इंकार किया। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि हरीश रावत वरिष्ठ राजनेता है। आत्मचिंतन तो इस समय सभी कांग्रेस नेताओं को करना चाहिए।
पोस्ट की मुख्य बातें
- हां, अब कहने का समय आ गया है
- 70 वर्ष की लक्ष्मण रेखा पार करने के बाद सक्रिय राजनीति में बने रहना सामान्य निर्णय नहीं है
- आप आक्रामक नहीं हो सकते, इसलिए लोग आपको गारंटेड लेने लगते हैं
- पार्टी को गो यंग के सिद्धांत पर दृढ़ता से अमल में लाना चाहिए
- मैं व्यक्ति के तौर पर अपना मूल्यांकन करना चाहता हूं
- लोकसभा चुनाव में मुझसे चूक हुई, मुझे अपने पुत्र को चुनाव लड़ाना चाहिए था। पौड़ी में पार्टी ने साहस किया
- आज जब मैं सक्रिय राजनीति में रहने या न रहने के प्रश्न पर गंभीर चिंतन कर रहा हूं, मेरी यही जिद उत्तराखंड के साथ थी या है। मैं उत्तराखंड को अपने आपको हरीश रावत के रूप में याद किए जाने को मजबूर करूंगा