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स्पर्श हिमालय महोत्सव: समापन सत्र में पहुंचे सीएम धामी, कहा- साहित्य और साहित्यकारों के लिए कार्य कर रही सरकार

Wed, 05 Nov 2025 02:40 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, जौलीग्रांट ( देहरादून)

सार

देहरादून के लेखक गांव में स्पर्श हिमालय महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव का आज तीसरा और अंतिम दिन है।
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लेखक गांव में सीएम धामी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश में साहित्य और साहित्यकारों के लिए उनकी सरकार कई कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री बुधवार को थानो के लेखक गांव में स्पर्श हिमालय महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने महोत्सव के तीसरे दिन के सातवें सत्र का शुभारंभ किया। महोत्सव में देश-विदेश के साहित्यकार शामिल हुए हैं।

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उन्होंने कहा कि सरकार ने उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान के माध्यम से उत्कृष्ट साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने का कार्य शुरू किया है। विभिन्न भाषाओं में ग्रंथ प्रकाशन के लिए वित्तीय सहायता के लिए साहित्यकारों को अनुदान भी दिया जा रहा है। उनकी सरकार साहित्यकारों को साहित्य भूषण और लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित कर रही है। जिसके अंतर्गत पांच-पांच लाख रुपये की सम्मान राशि दी जा रही है। युवा पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने के लिए कई प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी की प्रेरणा से लेखक गांव बसाया गया है। अटल जी लेखनी में पर्वतों की दृढता, गंगा की गहराई और हिमालय सी ऊंचाई थी। वो ओजस्वी वक्ता और उत्तराखंड के निर्माता हैं। अटल जी ने बताया कि शब्द भी राष्ट्र निर्माण के शस्त्र बन सकते हैं। उनकी सरकार संस्कृति और साहित्य के संरक्षण के लिए कई कार्य कर रही है। 
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नाड़ी विज्ञान और पर्यटन पर विशेष सत्र
लेखक गांव में स्पर्श हिमालय महोत्सव के तीसरे दिन योग, आध्यात्म, नाड़ी विज्ञान और पर्यटन पर विशेष सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें योग और नाड़ी रोग विशेषज्ञों ने योग और नाड़ी विज्ञान पर जानकारियां साझा की गई।

सत्र में नाड़ी रोग विशेषज्ञ लक्ष्मी नारायण जोशी ने कहा कि शरीर में मस्तिष्क से ही सभी रोग पैदा होते हैं। जिनके लक्षण शरीर द्वारा प्रकट किए जाते हैं। मस्तिष्क में ही सभी रोगों का निधन भी है।

आहार विहार और अनिद्रा के कारण रोगों की संख्या बढ़ रही है। इसलिए लगभग सभी लोग किसी न किसी रोग से पीड़ित हैं। लोग संयमित दिवस जीवनचार्य अपना कर रोगों को जड़ से खत्म कर सकते हैं। अवचेतन मन को स्वच्छ किए जाने की जरूरत है। कई दूसरे वक्ताओं ने भी विचार रखे।
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