उत्तराखंड में 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने अभी से रणनीति बनानी शुरू कर दी है। पार्टी के केंद्रीय नेताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश से सटी सीटों पर अगर दम लगाया जाय तो सरकार बनाने की चाभी अपने हाथ में की जा सकती है। इसके तहत करीब दो दर्जन सीटें चिन्हित की गई हैं।
समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों का कहना है कि उत्तराखंड में कांग्रेस-भाजपा के बीच कांटे की लड़ाई रहती है। अब तक इन दलों की ही सरकारें बनती रही हैं। पिछली बार दोनों दलों के बीच जीती सीटों का अंतर भी बहुत ज्यादा नहीं था। ऐसे में निर्दलीय विधायकों की भूमिका अहम हो गई थी। इन लोगों ने बसपा के दो विधायकों के साथ मिलकर पीडीएफ का गठन किया। इससे सत्ता की चाभी उनके हाथ आ गई।
अगर 2017 में सपा ने आठ से 10 सीटें जीत ली तो उनके बिना सरकार बनाना संभव नहीं होगा। एक बार सरकार में शामिल होने से समाजवादी पार्टी को राज्य की जनता के ज्यादा करीब आने का मौका मिलेगा। इससे भविष्य में राह के वे पुराने कांटे भी दूर हो सकेंगे जिनको लेकर पार्टी की आलोचना होती रही है।
समाजवादी पार्टी ने अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश से सटे गढ़वाल मंडल के हरिद्वार, देहरादून, कुमाऊं मंडल के ऊधमसिंह नगर, हल्द्वानी, नैनीताल आदि इलाकों की करीब दो दर्जन सीटों पर पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ने का मन बनाया है।
रणनीतिकारों का मानना है कि इन इलाकों के उत्तरप्रदेश से नजदीक होने के नाते यहां अखिलेश सरकार के जनहितकारी कार्यों की जानकारी लोगों को है। इसके अलावा पार्टी का परंपरागत वोट बैंक भी इन इलाकों में बड़ी संख्या में है। पार्टी के स्थानीय नेताओं का असर भी इस पार तक है।