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SP ने खुद देखा, इसे क्यों कहते हैं 'किलर' बस?

Fri, 01 Aug 2014 11:57 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून में सिटी बस चालकों-परिचालकों की मनमानी का खुलासा अमर उजाला लगातार अपनी खबरों के जरिए करता रहा है।
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हाल ही में सिटी बस की तेज रफ्तार हरबंसवाला में एक महिला की जान ले चुकी है। इससे पहले भी कई हादसों में लोग जान गवां चुके हैं।

अमर उजाला ने साफ किया था कि स्टापेज पर देरी से पहुंचने पर लगने वाले बीस रुपए का जुर्माना बचाने के लिए सिटी बस चालक सारे नियमों को ताक पर रख बसों को तूफान बना देते हैं।

रेड लाइट जंप करना, सड़क पर जहां-तहां बस रोककर सवारियां बिठाना, उतारना, बस में यात्रियों को टिकट न देना और यातायात नियमों का धड़ल्ले से उल्लंघन भी सिटी बस चालकों का शगल बन गया है।
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अमर उजाला की खबरों का संज्ञान लेकर एसपी ट्रैफिक प्रदीप राय ने गुरुवार को सिटी बसों में सफर का जायजा लिया। सादी वर्दी में वह बस में सवार हुए तो एक के बाद एक नियम टूटने की हकीकत नुमायां होती गई। पेश है, पूरी कहानी एसपी की जुबानी:

वर्दी छोड़ आम आदमी बन गए SP ट्रैफिक

प्रदीप राय (एसपी ट्रैफिक), देहरादून
देहरादून में सिटी बसें आवागमन का बड़ा साधन हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से सिटी बसों की वजह से सड़कों पर हादसे बढ़े हैं। बस चालकों की मनमानी की कई शिकायतें भी मुझे मिलती रही हैं।

ऐसे में गुरुवार को मैंने वर्दी छोड़ खुद एक सामान्य यात्री बनकर सिटी बसों में सफर करने का फैसला किया। इसके जरिये मैं सिटी बस चालकों की मनमानी जानने के अलावा बसों में सफर करने वाले यात्रियों की दिक्कतों को भी समझना चाहता था।
 
बस चालक और परिचालक मुझे पहचान नहीं सके। सफर के दौरान यात्रियों के साथ उनका जो बर्ताव था, उसे देख मैं हैरान रह गया।

प्रतिबंध के बावजूद प्रेशर हार्न का इस्तेमाल, सड़कों पर बेलगाम रफ्तार, ओवरटेक के दौरान खतरनाक कट मारते चालक और पायदान पर लटके परिचालक को देखकर तो मेरी धड़कनें बढ़ गईं।

शाम को दो सिटी बसों में किए सफर ने साफ कर दिया कि सिटी बसों के संचालन में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। लेकिन, मैं विश्वास दिलाता हूं कि शहर की सड़कों पर सफर सुरक्षित बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

पटेलनगर में छोड़ी नीली बत्ती

शाम करीब छह बजे मैं अपने सरकारी वाहन से पटेलनगर पहुंचा। मैं सादी वर्दी में आया था।

यहां लाल पुल के पास नीली बत्ती लगी गाड़ी और गनर को मैंने छोड़ दिया और लाल पुल पर बस के इंतजार में खड़े लोगों के बीच चला गया।

परिचालक ने नहीं दिया टिकट
शाम सवा छह बजे राजपुर-क्लेमेंटटाउन की बस के आते ही मैं इसमें सवार हो गया। इस दौरान भीड़ के चलते बस के भीतर घुसने में खासी दिक्कत हुई। मैंने परिचालक से आईएसबीटी जाने की बात कही।

उसने किराया तो ले लिया, लेकिन टिकट नहीं दिया। मैंने पूछा तो परिचालक बड़े तीखे अंदाज में बोला, इतने से सफर का टिकट नहीं मिलता। मैंने चुप्पी साध ली।

इसके बाद में सीट पर बैठ बस में दूसरी सवारियों की स्थिति देखने लगा। बस में कई महिलाएं सवार थीं, लेकिन उन्हें सीट नहीं मिली थी। जबकि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर पुरुष जमे हुए थे।

नियम पालन की कड़ी नसीहत दी

परिचालक ने इन पुरुषों को उठाकर महिलाओं को सीट देने की जरूरत नहीं समझी। वह तो प्रतिबंध के बावजूद पायदान पर खड़ा था।

बीच-बीच में चलती बस से आधा शरीर बाहर निकालकर वह सवारियों को आवाज देने लगता। चालक पर नजर गई तो वह भी बेवर्दी नजर आया, जबकि नियम है कि सिटी बस संचालकों को ग्रे कलर की वर्दी पहननी है।

शिमला बाईपास तक पहुंचते-पहुंचते मैंने आईएसबीटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को सूचना दे दी। बस का नंबर बताया और इसे रुकवा लिया।

पायदान पर खड़े होने के आरोप में चालक और परिचालक का चालान कर दिया गया। दोनों को नियम पालन की कड़ी नसीहत भी मैंने दी।

चालक के कट ने सुखाई जान

आईएसबीटी से शाम करीब सात बजे मैं राजपुर-क्लेमेंटटाउन रूट की ही दूसरी बस में सवार हुआ।

यह बस राजपुर की ओर जा रही थी। मैंने परिचालक से पैसिफिक मॉल तक जाने की बात कही। उसने पैसे ले लिए, लेकिन यहां भी मुझे टिकट नहीं दिया गया।

इस बस के चालक को तो जैसे नियमों की कोई परवाह ही नहीं थी। सड़क पर चलने वाले दूसरे वाहनों की भी फिक्र उसमें नजर नहीं आई। बेहद तेज रफ्तार पर बस चलाते हुए वह नियमों को ताक पर रखकर दूसरे वाहनों को ओवरटेक करता रहा।

इस दौरान वह कभी सड़क के दायीं ओर तो कभी बिलकुल बायीं ओर आ जाता। सच कहूं तो चालक के इन तीखे कटों ने मुझे भी चिंता में डाल दिया था। दूसरी ओर, इस बस में लगा प्रेशर हार्न मेरे कानों में दर्द करने लगा।

मैं बिना वर्दी में बस दौड़ा रहे चालक के ठीक पीछे वाली सीट पर बैठा था। जब भी चालक हार्न बजाता, मैं दोनों कान बंद कर देता। टीआई किशन सिंह रावत को मैंने पहले ही पैसिफिक मॉल के पास बुला लिया था।

बस के रुकते ही मैं उतरा और चालान की कार्रवाई शुरू कर दी। प्रेशर हार्न, तेज रफ्तार में बस दौड़ाने, वर्दी न पहनने पर चालान किया गया। परिचालक को भी यात्रियों से अभद्र बर्ताव पर फटकार लगाई।

(मेरे इस सफर के दौरान अमर उजाला के संवाददाता राकेश शर्मा और कैमरामैन अनिल डोगरा भी साथ रहे)
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बसों में लगाए हैं दो हार्न

एसपी ट्रैफिक के निरीक्षण के दौरान यह बात साफ हुई कि बस चालकों ने बसों में दो हार्न लगवाए हुए हैं। दरअसल, एसएसपी ने बसों से प्रेशर हार्न हटाने का आदेश दिया था।

लेकिन बस चालकों ने इन्हें हटाने के बजाय सामान्य हार्न भी लगाए हुए हैं। चौराहों, सड़कों पर पुलिसकर्मियों को देखकर चालक सामान्य हार्न बजाते हैं, लेकिन आगे बढ़ते ही तेज रफ्तार में प्रेशर हार्न का इस्तेमाल किया जाता है।

एलएमवी लाइसेंस पर दौड़ा रहे बस
निरीक्षण के दौरान बस संख्या यूके07-पीए-0436 का चालक सूरज कुमार के पास लाइट मोटर व्हीकल लाइसेंस मिला। जबकि वह हैवी व्हीकल (बस) दौड़ा रहा था।

खास बात यह थी कि सूरज कुमार का चालान नौ जुलाई को भी किया गया था। तब उसका लाइसेंस जब्त कर लिया गया था। इसके बाद भी वह धड़ल्ले से बस चला रहा था।

कमियों पर तैयार करेंगे विस्तृत रिपोर्ट
एसपी ट्रैफिक प्रदीप राय ने बताया कि सफर के दौरान सिटी बसों में पाई गई कमियों की वह विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे।

इसके बाद बस संचालकों से बातचीत कर सुधार के लिए कहा जाएगा। बताया कि कुछ समय बाद वह फिर सिटी बसों की आकस्मिक चेकिंग करेंगे।

(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी-rakeshk@mrt.amarujala.com और इस नंबर-9675501486 पर संपर्क कर सकते हैं।)
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