यूपी में सपा कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी, लेकिन यह फार्मूला उत्तराखंड में लागू नहीं होगा। दोनों ही पार्टियां उत्तराखंड में एक दूसरे से दो-दो हाथ करेंगी।
प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने रविवार को जहां 63 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। वहीं सपा प्रत्याशियों की संशोधित सूची भी सोमवार को जारी होने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। दोनों ही पार्टियों को बीच सीटों के बंटवारे का फार्मूला तय हो गया है, लेकिन यह समझौता उत्तराखंड में लागू नहीं होगा।
50 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना
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दरअसल, यूपी और उत्तराखंड के राजनीतिक परिदृश्य में अंतर है। राज्य के गठन के बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में सपा अपना खाता तक नहीं खोल पाई है। 2012 के विधानसभा चुनावों में सपा का मत प्रतिशत महज डेढ़ फीसदी के आसपास था।
सपा ने 2017 के विधानसभा चुनावों में प्रदेश में लगभग 50 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना तैयार बनाई है।
इसको लेकर 26 प्रत्याशियों की सूची भी 15 जनवरी को शिवपाल यादव ने जारी कर दी थी, लेकिन अखिलेश यादव द्वारा पार्टी की कमान संभालने के बाद इस पर रोक लगा दी गई है।
समझौता सिर्फ यूपी विधानसभा चुनावों के लिए
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सपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. एसएन सचान का कहना है कि सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर समझौता सिर्फ यूपी विधानसभा चुनावों के लिए है।
अन्य राज्यों के लिए यह समझौता नहीं है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने 63 सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। सपा भी सोमवार को प्रत्याशियों की संशोधित सूची जारी कर सकती है।
किरणमय नंदा का कार्यक्रम स्थगित
सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा का सोमवार को देहरादून आने का कार्यक्रम स्थगित हो गया है। पाटी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. एसएन सचान ने बताया कि यूपी चुनावों में व्यस्तता की वजह से नंदा सोमवार को नहीं आएंगे। वह अब मंगलवार को देहरादून आ सकते हैं।