अपने 16 मिनट के नपे-तुले भाषण में सोनिया गांधी ने जहां विरोधियों पर हमला किया, वहीं हर वर्ग को साधने की कोशिश भी की।
उन्होंने पहले मोदी और इसके बाद महाकुंभ घोटाले की बात कर पूर्ववर्ती भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उत्तराखंड में आई भीषण आपदा के बावजूद राज्य के तीन तीर्थ स्थलों के रास्ते बहाल करने को लेकर मुख्यमंत्री की पीठ भी थपथपाई।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी रविवार को लीथोप्रेस मैदान पर दो साल में दूसरी बार जनता से रूबरू थीं।
कांग्रेस सरकार में पहली बार
इससे पूर्व राज्य के विधानसभा चुनाव के दौरान सोनिया ने 17 जनवरी, 2012 को आयोजित रैली में यहां भाषण दिया था। उस वक्त प्रदेश में भाजपा की सरकार थी।
तब हरिद्वार महाकुंभ के दौरान निशंक पर लगे आरोपों को सोनिया ने मंच से धार देते हुए कहा था कि भाजपा की ईमानदारी महाकुंभ में बह गई।
इस बार भी उन्होंने मोदी पर आक्रामक वार करने के बाद निशंक का नाम लिए बगैर कहा कि आप सभी जानते हैं किस तरह से महाकुंभ के लिए दिया गया हजारों करोड़ रुपया चंद लोगों की जेबों में गया।
मनमोहन सरकार की तारीफ
इसके अलावा उन्होंने देश की प्रगति के पीछे देशवासियों की मेहनत और कांग्रेस नेताओं का विजन बताते हुए मनमोहन सिंह सरकार के दस सालों की तारीफ की।
वन रैंक, वन पेंशन का जिक्र कर उत्तराखंड के सैनिकों का दिल जीतने की कोशिश की। उनके भाषण में शिक्षा का अधिकार, खाद्य सुरक्षा योजना, किसानों की कर्ज माफी, फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाने और भूमि अधिग्रहण बिल का जिक्र भी आया।
उन्होंने दलित, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हित में केंद्र सरकार की ओर से किए गए कार्यों की याद भी दिलाई।
तब भाजपा ने बदला था सीएम, अब कांग्रेस ने
इसे इत्तेफाक कहें या कुछ और, क्योंकि पहली बार जब 17 जनवरी 2012 को सोनिया गांधी ने यहां भाषण दिया था, तब चुनाव से पहले ही प्रदेश में भाजपा का निजाम बदला था और रमेश पोखरियाल निशंक को हटाकर भुवन चंद खंडूड़ी को सीएम बनाया गया था।
इस बार चुनाव से पूर्व कांग्रेस ने राज्य की सत्ता में परिवर्तन किया और विजय बहुगुणा की जगह हरीश रावत को कमान सौंपी।