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घरवाले नहीं आए सामने तो मीना के लिए डॉक्टर बने 'भगवान', खुद के रिस्क पर ब्रेन का ऑपरेशन कर बचाई जान

Fri, 15 Nov 2019 10:00 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : फाइल फोटो
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देहरादून के दून मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीज मीना देवी उम्र 45 साल के लिए अस्पताल के डॉक्टर किसी भगवान से कम नहीं साबित हुए। महिला कई दिन से अस्पताल में भर्ती थी, लेकिन बार-बार संपर्क करने के बाद भी उसका बेटा और परिवार वाले अस्पताल नहीं आ रहे थे। 

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ऐसे में जान का खतरा देखते हुए डॉक्टरों ने खुद के ही रिस्क पर महिला का ब्रेन का ऑपरेशन कर उसकी जान बचाई। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर के के टम्टा ने महिला का ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर डीपी तिवारी, डॉक्टर विजय भंडारी और डॉक्टर अतुल का आभार व्यक्त किया। प्राचार्य डॉ आशुतोष सायना ने पूरी टीम को बधाई दी। 

ये था पूरा मामला

कुछ दिन पहले दून अस्पताल में बेहोशी की हालत में एक युवक एक महिला को भर्ती करवा कर लापता हो गया। युवक उनका मकान मालिक बताया जा रहा है। चिकित्सीय जांच में महिला के दिमाग में खून का थक्का जमा होने का पता चला है। इसके लिए उसका ऑपरेशन होना जरूरी था। लेकिन, परिजनों के सामने नहीं आने पर ऑपरेशन नहीं हो पा रहा था। 

अस्पताल प्रशासन इस संबंध में तीन बार शहर कोतवाली और मसूरी कोतवाली पुलिस को सूचना भी दी। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने बताया कि तीन नवंबर की दोपहर एक युवक एक महिला को बेहोशी की हालत में अस्पताल लेकर पहुंचा। महिला का नाम मीना देवी (45) पत्नी भोपाल सिंह निवासी नाग मंदिर मार्ग बताया। कुछ समय बाद युवक वहां से लापता हो गया। 
 
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हृदयरोगी भी थी महिला

सिटी स्कैन में महिला के दिमाग में खून का थक्का होने का पता लगा। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. टम्टा ने बताया कि महिला के बेटे बताए गए अज्जू और उसे अस्पताल लाने वाले युवक के मोबाइल पर कई बार कॉल की, लेकिन उन्होंने अस्पताल आने से साफ इनकार कर दिया।

महिला हृदयरोगी भी है और उसके हृदय में वाल्व पड़ा हुआ है। ऐसे में उनका एमआरआई भी नहीं हो सकता। ऑपरेशन के दौरान महिला की जान को खतरा हो सकता था। ऐसे में ऑपरेशन के लिए परिजनों की अनुमति जरूरी थी। गुरुवार को भी जब परिजन अस्पताल नहीं आए तो डॉक्टरों ने महिला की जान को खतरा देखते हुए ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। 
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