बचपन में जिस बेटे को उंगली पकड़कर चलना सिखाया। पढ़ा लिखाकर सरकारी संस्थान में अफसर बनने के काबिल बनाया, वही बेटा 80 साल की बुजुर्ग मां से हाथ छुड़ाकर पत्नी के साथ चलता बना।
'बागबां' फिल्म की यह रियल कहानी रुड़की कोतवाली में उस वक्त सामने आई, जब बेटे और बहू ने बुजुर्ग मां को साथ रखने से साफ इनकार कर दिया। यह दृश्य देखकर कोतवाली में आम लोगों के साथ-साथ पुलिसकर्मी भी हैरान थे।
शहर में सब्जी मंडी के पास पत्थर वाली गली निवासी एक बुजुर्ग महिला ने रविवार को पुलिस से गुहार लगाई थी कि उसके बेटे-बहू के घर में उसे शरण दिलाई जाए। पुलिस ने बेटे-बहू को कोतवाली बुलाया, मगर एक बूढ़ी मां को आसरा न मिल सका। पुलिस के जानकारी लेने पर जो कहानी सामने आई, वह बिल्कुल बागबां फिल्म की तरह थी।
बुजुर्ग महिला के चार बेटों में बड़ा बेटा रुड़की में एक राष्ट्रीय संस्थान में अफसर है। दूसरा बेटा कोटद्वार में अपने परिवार के साथ रहता है। तीसरा बेटा कहने सुनने से बाहर है और सबसे अलग अकेला रहता है, जबकि चौथे बेटे की पत्नी उसे छोड़कर जा चुकी है। वही मां के साथ रहता है।