लाडला घर छोड़कर गया तो जैसे जिंदगी अधूरी हो गई। पूरे एक साल उसकी तलाश में दरबदर भटकते रहे। आखिर भगवान की कृपा बरसी भी।
आंखों का तारा घर लौट आया
एक मंदिर में बेटा मिल गया। अब आंखों का तारा घर लौट आया है तो आंसुओं से भीगी आंखें भी चमकने लगी हैं। यह कहानी है चुक्खू मोहल्ला निवासी महेश वर्मा की।
महेश का 13 वर्षीय बेटा आयुष 28 मई 2012 को घर से लापता हो गया था। उसकी गुमशुदगी धार चौकी में दर्ज थी। काफी तलाश के बाद भी उसका कुछ पता नहीं चला। आयुष की याद में उसकी नानी बीमार रहने लगी। कहीं से आस नहीं रही तो परिजनों का मन अध्यात्म की ओर झुकने लगा।
बीती सोमवार रात पूरा परिवार जम्मू के वैष्णो देवी मंदिर के पास स्थित अर्द्ध कुमारी मंदिर में चल रहे कीर्तन का लाइव प्रसारण एक धार्मिक चैनल पर देख रहा था। इसी दौरान आयुष की मां रीता वर्मा की नजर मंदिर के एक कोने में भजन में मस्त एक बच्चे पर पड़ी। मां की नजरें तुरंत बेटे को पहचान गईं। महेश तुरंत धारा चौकी गए और पुलिस को जानकारी दी।
मंदिर में लंगर खा रहा था
मंगलवार को पुलिस परिजनों को लेकर जम्मू पहुंची। तब आयुष मंदिर में लंगर खा रहा था। परिवार उसे लेकर लौट आया। आयुष ने बताया कि बचपन में वह नानी के साथ मंदिर में आया था। ऐसे में घर से निकलने के बाद सीधे यहां आ गया। घर छोड़ने की वजह उसने पढ़ाई में मन न लगना बताई। उधर, बुधवार को घर लौटे आयुष को गले लगा मां रीता की आंखें खुशी से छलक उठीं।
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