बीते ढाई साल से कश्मीर के कुलगाम अनंतनाग में तैनात थे। जहां बीते 10 अप्रैल की रात आतंकियों के खिलाफ चले अभियान में वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए। जिसके बाद बीते 13 अप्रैल को उन्हें दिल्ली स्थित सेना के आरआर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
दो गोलियां उनके फेफड़े को चीरती हुई दिल के पास लगी थी। उनकी नाजुक हालत को देखते हुए करीब 17 दिन बाद इलाज के लिए एक मई को एयर एंबुलेंस के जरिये पुणे पैराप्लेजिक रिहेब सेंटर रेफर किया गया।
जहां 20 दिन बाद रविवार सुबह करीब छह बजे डॉक्टरों ने दीपक को मृत घोषित कर दिया। दीपक के भाई प्रदीप नैनवाल ने बताया कि बीते शनिवार की रात चिकित्सकों का फोन आया था, जिसमें उन्होंने दीपक की हालत नाजुक बताई थी। उनके साथ पिता चक्रधर प्रसाद, पत्नी ज्योति मौजूद थे।
नायक दीपक नैनवाल के पिता चक्रधर प्रसाद ऑननरी कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने बताया कि उन्हें बेटे पर गर्व है, उसने देश के लिए अपनी जान दी है।
वहीं, बेटे की मौत की खबर से हर्रावाला स्थित मकान में मातम का माहौल है। दीपक की माता पार्वती व उनके बच्चे रेयांश और लावण्या घर पर हैं, घर पर लोगों को तांता लगा हुआ है। जवान नायक दीपक नैनवाल का पार्थिव शरीर सोमवार दोपहर तीन बजे आने की संभावना है।
मुख्यमंत्री से की एयर एंबुलेंस की मांग
प्रदीप नैनवाल ने बताया कि उन्होंने दीपक का पार्थिव शरीर लाने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से एयर एंबुलेंस की मांग की है। जिस पर उन्हें एयर एंबुलेंस के लिए सेना के अधिकारियों से वार्ता करने का आश्वासन दिया गया है।