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अटल आयुष्मान योजना में अस्पताल नहीं कर पाएंगे धोखाधड़ी, अब सॉफ्टवेयर पकड़ लेगा फर्जीवाड़ा

Tue, 25 Jun 2019 08:47 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। अभी तक लाखों रुपये का क्लेम देने के बाद किसी अस्पताल का फर्जीवाड़ा पकड़ में आ रहा था, लेकिन अब अस्पतालों के कारनामे सॉफ्टवेयर ही पकड़ लेगा। शासन ने दावा किया है कि एक माह में नई व्यवस्था शुरू हो जाएगी। 

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अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना में सूचीबद्ध अस्पतालों में शामिल 12 अस्पतालों को फर्जीवाड़ा करने पर निलंबित किया जा चुका है। इन अस्पतालों के संचालकों ने कई तरह से फर्जीवाड़ा कर लाखों रुपये की क्लेम की राशि प्रदेश सरकार से हासिल की।

किसी के मालिक डॉक्टर ने फर्जी तरीके से मरीजों को रेफर किया तो किसी ने इलाज किए बिना ही क्लेम ले लिया। कहीं, एक ही डॉक्टर दो जगह काम कर रहा था तो किसी अस्पताल में बिना प्री-अथोराइजेशन के इलाज शुरू कर दिया।
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ये सब अस्पताल पकड़ में तो जरूर आए लेकिन तब तक लाखों रुपये इनके खाते में जा चुका था। लेकिन, अब इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सॉफ्टवेयर ही बदला जा रहा है। राज्य स्वास्थ्य अभिकरण के अध्यक्ष दीलीप कोटिया ने बताया कि अब फर्जीवाड़ा करना नामुमकिन होगा। 

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53 लाख रुपये का क्लेम हड़प गए अस्पताल 

गत 26 जनवरी को शुरू हुई योजना में फर्जीवाड़े की गुंजाइश न के बराबर बनाई गई थी। लेकिन, इसकी साख पर बट्टा लगाने वाले अस्पतालों ने नई-नई तरकीब निकालकर फर्जीवाड़े कर अब तक करीब 53 लाख रुपये से ज्यादा का क्लेम हड़प लिया है। जबकि, लगभग 52 लाख रुपये का क्लेम कार्रवाई के तौर पर बीच में रोक दिया गया। हालांकि, अब गलत तरीके से हड़पी गई क्लेम की राशि का पांच गुना तक वसूलने की बात कही जा रही है, लेकिन अभी तक किसी अस्पताल पर इस तरह की कार्रवाई नहीं की गई है।   

सॉफ्टवेयर ऐसे करेगा काम 
- किसी अस्पताल ने मरीज को आईसीयू से ही छुट्टी देना दर्शाया तो क्लेम पास नहीं होगा। 
-एक डॉक्टर का नाम यदि दो अस्पतालों में दर्ज है तो अस्पताल को क्लेम जारी नहीं होगा। 
- रेफर स्लिप पर यदि संबंधित अस्पताल के चिकित्सक के साइन नहीं होगे तब भी क्लेम नहीं। 
-प्री-अथोराइजेशन के बिना इलाज शुरू किया तो क्लेम को तत्काल ही रोक दिया जाएगा। 

जिला स्तर पर भी बनेगी एंटी फ्रॉड कमेटी 
प्रदेश में डॉक्टर, आईटी एक्सपर्ट और प्रशासनिक स्टाफ को मिलाकर एंटी फ्रॉड कमेटी बनाई जा चुकी है। चूंकि, योजना का दायर बड़ा है तो अकेली इस कमेटी पर ज्यादा बोझ बढ़ जाएगा। इसको भाग में बांटने के लिए जिला स्तर पर एंटी फ्रॉड कमेटियां बनाई जाएंगी। इस तरह की कमेटियों को बनाने का प्रावधान भारत आयुष्मान की केंद्रीय नियमावली में भी है। इन कमेटियों को नियमावली के आधार पर गठित किया जाएगा।
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